सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वोटिंग से 48 घंटे पहले नाम जुड़ा तो भी डाल सकेंगे वोट

The Red Ink
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम स्पष्टता दे दी है। अदालत ने कहा है कि अगर किसी मतदाता का नाम मतदान से ठीक दो दिन पहले भी सूची में शामिल किया जाता है, तो वह व्यक्ति वोट डालने के लिए पात्र होगा।

अंतिम फैसला ही तय करेगा वोट का अधिकार
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अपीलेट ट्रिब्यूनल अगर किसी अपील को स्वीकार कर नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम आदेश देता है, तो उसे चुनाव से पहले लागू किया जाएगा। इस फैसले में अदालत ने अपने विशेष अधिकार अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित किया कि चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह का भ्रम न रहे।

पेंडिंग अपील से नहीं मिलेगा फायदा
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ अपील लंबित होने के आधार पर किसी को वोटिंग का अधिकार नहीं दिया जा सकता। कोर्ट का तर्क है कि अगर ऐसा किया गया, तो यह पूरी चुनाव प्रक्रिया को विवादों में धकेल सकता है, क्योंकि फिर हर कोई आपत्ति के आधार पर वोटिंग रोकने की मांग कर सकता है।

चुनाव आयोग को तय समयसीमा
अदालत ने Election Commission of India को निर्देश दिया है कि- पहले चरण से पहले 21 अप्रैल 2026 तक अपीलों का निपटारा होने पर संशोधित मतदाता सूची जारी की जाए, दूसरे चरण के लिए यह डेडलाइन 27 अप्रैल 2026 रखी गई है

मतदान की तारीखें तय
राज्य में चुनाव दो चरणों में होंगे- पहला चरण: 23 अप्रैल 2026, दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इन तारीखों से ठीक पहले लिए गए फैसले ही वोटिंग के अधिकार को तय करेंगे।

तीन दिन बाद सार्वजनिक हुआ आदेश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला पहले ही सुना दिया था, लेकिन अब इसे आधिकारिक तौर पर वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।

फैसले का सीधा मतलब
अब तस्वीर पूरी तरह साफ है, अंतिम आदेश में नाम जुड़ा → वोट डाल सकेंगे, अंतिम आदेश में नाम हटा → वोट नहीं डाल सकेंगे, केवल अपील लंबित → कोई अधिकार नहीं।

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