The Red Ink
उत्तर प्रदेश टीजीटी परीक्षा के दूसरे दिन गुरुवार को प्रदेशभर के परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली। कई जगह अभ्यर्थियों को जूते उतरवाकर और महिला उम्मीदवारों के बाल खुलवाकर जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया। वहीं परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने इंग्लिश प्रश्नपत्र को सिलेबस से बाहर और अपेक्षाकृत कठिन बताया।
सख्त सुरक्षा के बीच हुई परीक्षा
प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन, पहचान पत्र और एडमिट कार्ड की कई स्तरों पर जांच की गई। कानपुर सहित कई केंद्रों पर उम्मीदवारों की गहन तलाशी ली गई। महिलाओं को क्लचर, चूड़ियां, बालियां और अन्य धातु की वस्तुएं हटाने के बाद ही प्रवेश मिला।
देर से पहुंचे अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत
प्रयागराज और हाथरस समेत कई जिलों में कुछ अभ्यर्थी निर्धारित समय से कुछ मिनट देरी से परीक्षा केंद्र पहुंचे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। प्रयागराज में एक अभ्यर्थी ने केंद्र के बाहर अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा कि उसका भविष्य दांव पर है, फिर भी नियमों के चलते उसे प्रवेश नहीं मिला। हाथरस में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। अलीगढ़ से परीक्षा देने पहुंची एक अभ्यर्थी गलत केंद्र पर पहुंच गई, जिसके कारण वह निर्धारित समय से देर हो गई और परीक्षा देने से वंचित रह गई।
इंग्लिश पेपर को लेकर छात्रों की नाराजगी
परीक्षा समाप्त होने के बाद कई उम्मीदवारों ने इंग्लिश विषय के प्रश्नपत्र को लेकर असंतोष जताया। आगरा की अभ्यर्थी नीतू सिंह ने कहा कि साहित्य खंड के अधिकांश प्रश्न अपेक्षा से अधिक कठिन थे और कई सवाल पाठ्यक्रम से बाहर के लगे। प्रयागराज में परीक्षा देने पहुंचे राहुल वर्मा ने दावा किया कि प्रश्नपत्र में शामिल अधिकांश सवाल निर्धारित सिलेबस से मेल नहीं खाते थे। उनका कहना था कि सिलेबस में जिन लेखकों का उल्लेख था, उनसे जुड़े बहुत कम प्रश्न पूछे गए। प्रतापगढ़ की हुमा फरीद ने भी पेपर के स्तर पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रश्नपत्र टीजीटी की बजाय पीजीटी या नेट परीक्षा जैसा महसूस हुआ। उनके अनुसार यदि प्रश्न सिलेबस के भीतर होते तो कठिनाई का आकलन किया जा सकता था, लेकिन अधिकांश प्रश्न अपेक्षित पाठ्यक्रम से बाहर दिखाई दिए।
कुछ अभ्यर्थियों ने पेपर को बताया संतुलित
हालांकि सभी उम्मीदवारों की राय एक जैसी नहीं रही। बस्ती से गोरखपुर परीक्षा देने पहुंचे सूर्य प्रकाश चौधरी ने प्रश्नपत्र को “मॉडरेट” बताया। उन्होंने कहा कि कुछ प्रश्न चुनौतीपूर्ण जरूर थे, लेकिन कुल मिलाकर पेपर संतुलित था।
सील खुले प्रश्नपत्र का आरोप
आजमगढ़ के एक अभ्यर्थी बी.एल. यादव ने दावा किया कि उन्हें जो प्रश्नपत्र मिला उसकी सील पहले से क्षतिग्रस्त थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद परीक्षा अधिकारियों ने परीक्षा जारी रखने को कहा।
पहले दिन पकड़े गए फर्जी अभ्यर्थी
गौरतलब है कि टीजीटी परीक्षा के पहले दिन प्रदेशभर में 11 फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान की गई थी। इनमें से नौ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो मौके से फरार हो गए। परीक्षा 36 जिलों के 614 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। कुल 3,539 पदों के लिए करीब 8.68 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।
परीक्षा में अनुपस्थिति भी रही चर्चा में
वाराणसी में पहले दिन बड़ी संख्या में उम्मीदवार परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंचे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पहली पाली में लगभग 65 प्रतिशत और दूसरी पाली में 54 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी।




