‘हम कॉकरोच हैं, पीछे हटने वाले नहीं’… जंतर-मंतर पर Gen-Z का गुस्सा कैसे बना देशव्यापी छात्र आंदोलन?

The Red Ink:

कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट के एक बयान के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच’ शब्द अचानक चर्चा का केंद्र बन गया। देखते ही देखते इसी नाम से बना एक ऑनलाइन अभियान लाखों युवाओं तक पहुंच गया। बाद में NEET पेपर लीक विवाद ने इस डिजिटल मुहिम को जमीन पर उतार दिया और ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटने लगे।

जंतर-मंतर पर उमड़ी Gen-Z की भीड़

20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के आह्वान के बाद दिल्ली की सड़कों पर बड़ी संख्या में छात्र दिखाई दिए। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और केरल समेत कई राज्यों से युवा राजधानी पहुंचे। जनपथ, कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पर घंटों तक छात्रों का जमावड़ा रहा। कई जगहों पर रास्ते और मेट्रो स्टेशन बंद होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों का पहुंचना जारी रहा।

बारिश, बैरिकेड और लाठीचार्ज… लेकिन नहीं थमा प्रदर्शन

बारिश और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। दोपहर बाद कई इलाकों में पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद देर शाम तक बड़ी संख्या में छात्र जमे रहे। कई घायल हुए, कई की चप्पलें और सामान टूट गए, लेकिन प्रदर्शन छोड़ने को तैयार नहीं दिखे।

‘जय भीम’ और ‘आज़ादी’ के नारों से गूंजा इलाका

धरना स्थल पर लगातार ‘जय भीम’ के नारे सुनाई दिए, वहीं शाम होते-होते ‘आज़ादी-आज़ादी’ के गीत भी माहौल का हिस्सा बन गए। कई छात्र हाथों में संविधान और भगत सिंह की तस्वीरें लिए दिखाई दिए। प्रदर्शन केवल परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जवाबदेही, शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित होता नजर आया।

देशभर से पहुंचने लगी मदद

धरनास्थल पर सिर्फ प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि देशभर से भेजी जा रही मदद भी चर्चा का विषय बनी। ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स के जरिए भोजन, पानी, दवाइयां, सैनिटरी पैड्स और अन्य जरूरी सामान लगातार पहुंचता रहा। कई डिलीवरी पार्टनर सीधे प्रदर्शनकारियों तक राहत सामग्री पहुंचाते नजर आए। स्वयंसेवकों ने भी वितरण की जिम्मेदारी संभाली ताकि सामान सही लोगों तक पहुंचे।

अजनबी बने आंदोलन के साथी

धरना स्थल पर कई ऐसे छात्र मिले, जो पहली बार एक-दूसरे से मिले थे, लेकिन आंदोलन ने उन्हें साथ खड़ा कर दिया। किसी ने घायल छात्र की मदद की, तो किसी ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए साथ रहना चुना। कई परिवार भी अपने बच्चों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे। इस दौरान बने रिश्तों और एकजुटता की भावना ने आंदोलन को अलग पहचान दी।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के अपने-अपने दावे

दिल्ली पुलिस का कहना है कि विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। पुलिस ने अपने जवानों के घायल होने का दावा करते हुए कुछ वीडियो भी साझा किए। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध के दौरान उन पर बल प्रयोग किया गया। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

अब सिर्फ NEET नहीं, व्यापक बदलाव की मांग

शुरुआत भले ही NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से हुई हो, लेकिन जंतर-मंतर पर मौजूद कई छात्रों का कहना है कि अब यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, यह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग का प्रतीक बन चुका है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा अब इसे अपने भविष्य से जुड़ी लड़ाई मान रहे हैं।

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