Nepal Flood Rescue अभियान में अब तक करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, लेकिन हजारों लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल की सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ के आठ दिन बाद बुधवार शाम तक 11,993 लोगों को बचाया गया, जबकि 4,216 लोगों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। बाढ़ में मरने वालों की संख्या भी 1,200 से ऊपर पहुंच चुकी है।
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल लापता लोगों की तलाश और उन्हें खोजने का अभियान प्राथमिकता के आधार पर चलाया जा रहा है। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के हजारों जवान लगातार तलाशी और बचाव अभियान में जुटे हुए हैं।
Nepal Flood Rescue में 11,993 लोगों की जान बचाई गई
Nepal Flood Rescue अभियान के तहत बुधवार शाम तक 11,993 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका था। सरकारी एजेंसियों के अनुसार, भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े इलाके को प्रभावित किया है।
बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं और कुछ स्थानों पर भूस्खलन की वजह से राहत और बचाव कार्य में मुश्किलें भी सामने आ रही हैं। इसके बावजूद सुरक्षाबलों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की तलाश कर रही हैं।
4,216 लोग अब भी लापता
बचाव अभियान के बावजूद बुधवार शाम तक 4,216 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया था। अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों की तलाश को प्राथमिकता दी जा रही है।
सुरक्षाकर्मी नदी के किनारों, बाढ़ प्रभावित बस्तियों, सड़कों और भूस्खलन वाले क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। जिन इलाकों तक पहुंचना मुश्किल है, वहां भी लापता लोगों की जानकारी जुटाने और संभावित स्थानों पर तलाश करने की कोशिश की जा रही है।
बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,200 से ऊपर पहुंच चुकी है। ऐसे में लापता लोगों की संख्या ने प्रशासन और बचाव एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ा दी है।
Nepal Flood Rescue में 21,314 सुरक्षाकर्मी तैनात
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी की प्रवक्ता शांति महत ने नेपाल की सरकारी समाचार एजेंसी RSS को बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में कुल 21,314 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
इनमें नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान शामिल हैं। सभी सुरक्षा बलों की टीमें अलग-अलग प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, अभियान में नेपाल पुलिस के 7,912, सशस्त्र पुलिस बल के 4,203 और नेपाल सेना के 9,199 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
नदी किनारे और भूस्खलन वाले इलाकों में तलाशी
बचाव दल केवल बाढ़ प्रभावित बस्तियों तक सीमित नहीं हैं। सुरक्षाकर्मी नदी के किनारों, सड़कों और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भी तलाशी अभियान चला रहे हैं।
बाढ़ के पानी के साथ मलबा और अन्य सामग्री बहने के कारण कई इलाकों में लोगों की तलाश चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में सुरक्षाबलों की अलग-अलग टीमें संभावित स्थानों पर तलाशी कर रही हैं।
सुरक्षाबलों के जवान भी लापता
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ का असर बचाव अभियान में जुटे सुरक्षाकर्मियों पर भी पड़ा है। राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के मुताबिक, नेपाल सेना के 45, नेपाल पुलिस के 25 और सशस्त्र पुलिस बल के 13 सदस्य भी लापता हैं।
यानी बाढ़ के बाद सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि राहत और बचाव कार्य में शामिल सुरक्षाबलों के कई जवानों से भी संपर्क नहीं हो पाया है।
प्रशासन के सामने अब एक तरफ लापता लोगों को खोजने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान को लगातार जारी रखने की जिम्मेदारी भी है।
तलाश अभियान पर प्रशासन की नजर
अधिकारियों के मुताबिक, लापता लोगों की तलाश फिलहाल अभियान की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रही हैं।
Nepal Flood Rescue अभियान के दौरान अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन 4,216 लोगों का अब भी पता नहीं चल पाना चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं 1,200 से अधिक लोगों की मौत के बाद इस आपदा का मानवीय नुकसान बेहद गंभीर हो गया है।
आने वाले दिनों में तलाशी अभियान के आगे बढ़ने के साथ लापता लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल नेपाल की सरकारी एजेंसियां और सुरक्षाबल प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान जारी रखे हुए हैं।




