The Red Ink
दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग से ज्यादा जानलेवा साबित हुई इमारत की संरचना और सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी, जिसने लोगों के बच निकलने की उम्मीद लगभग खत्म कर दी।
धुएं में घिर गए कमरे, मदद की गुहार भी बेअसर
हादसे में जान गंवाने वालों में गुरुग्राम का एक पूरा परिवार भी शामिल है। परिवार के सदस्य अपने बुजुर्ग रिश्तेदार के इलाज के सिलसिले में दिल्ली आए थे और पास के होटल में ठहरे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, आग लगने के बाद कुछ लोगों ने फोन कर मदद मांगी, लेकिन तेजी से फैलते धुएं और आग के कारण वे बाहर नहीं निकल सके।
खिड़कियां थीं बंद, बाहर निकलने का दूसरा रास्ता नहीं
दमकल अधिकारियों के मुताबिक, इमारत में वेंटिलेशन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। कई खिड़कियां स्थायी रूप से बंद कर दी गई थीं, जिससे धुआं बाहर नहीं निकल सका। आग लगने के कुछ ही मिनटों में पूरा भवन धुएं से भर गया और लोग कमरों में फंस गए। बचावकर्मियों का कहना है कि होटल में बाहर निकलने का वैकल्पिक रास्ता भी नहीं था। यही वजह रही कि कई लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों और ऊपरी मंजिलों से कूदने तक की कोशिश करनी पड़ी।
होटल नहीं, बीएंडबी लाइसेंस पर चल रही थी इमारत
जांच में यह भी सामने आया है कि जिस इमारत को होटल के रूप में संचालित किया जा रहा था, वह आधिकारिक रिकॉर्ड में होटल नहीं थी। उसे बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) योजना के तहत पंजीकृत किया गया था। इस योजना में सीमित कमरों के संचालन की अनुमति होती है, लेकिन भवन में दर्जनों कमरे बनाए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इमारत का व्यावसायिक उपयोग निर्धारित नियमों से कहीं अधिक स्तर पर किया जा रहा था। भवन में एक रेस्टोरेंट भी संचालित हो रहा था, जिससे जोखिम और बढ़ गया।
राहत कार्य में आईं कई चुनौतियां
दमकल विभाग को सुबह आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हालांकि भवन के भीतर पहुंचना आसान नहीं था। संकरी संरचना, घना धुआं और बंद निकास मार्ग बचाव अभियान में बड़ी बाधा बने। स्थानीय लोगों और सुरक्षा कर्मियों ने भी राहत कार्य में हिस्सा लिया। कई लोगों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया, जबकि कुछ को मौके पर ही मृत पाया गया।
सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद भवन में अग्नि सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत में न तो पर्याप्त फायर फाइटिंग सिस्टम था और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भवन में सुरक्षा मानकों का सही ढंग से पालन किया गया होता, तो इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि लाइसेंस, निरीक्षण और सुरक्षा नियमों के पालन में कहां-कहां चूक हुई।
जांच के घेरे में होटल प्रबंधन
हादसे के बाद होटल संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित विभागों की ओर से निरीक्षण और निगरानी में कोई लापरवाही तो नहीं हुई। यह हादसा एक बार फिर शहरी इलाकों में संचालित हो रहे ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर गया है, जहां नियमों की अनदेखी लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।




