The Red Ink: एक कहानी जिसने लोगों को भावुक कर दिया था अब वही कहानी शक के घेरे में खड़ी है। फीस के लिए किडनी बेचने का दावा करने वाला आयुष, अब अपनी ही बातों में उलझता दिख रहा है। जांच आगे बढ़ी तो सामने आई जानकारी ने इस पूरे मामले को एक बिल्कुल अलग दिशा दे दी है।
वायरल हुई कहानी… और फिर शुरू हुई पड़ताल
जब आयुष ने पुलिस के सामने कहा कि उसने पढ़ाई जारी रखने के लिए किडनी बेची, तो यह बात तेजी से फैल गई। लोगों ने इसे मजबूरी और संघर्ष की मिसाल मान लिया लेकिन जैसे ही पुलिस ने तह तक जाने की कोशिश की, कहानी के कई हिस्से मेल नहीं खाते दिखे।
जमींदार परिवार, बड़े सपने और शुरुआती मोड़
आयुष बिहार के बेगूसराय के औगान गांव का रहने वाला है। उसका परिवार कभी गांव में अच्छी स्थिति में माना जाता था। पिता राजेश चौधरी अपने बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे और इसी सोच के साथ 2015 में इंटर के बाद उसे विशाखापट्टनम में कोचिंग के लिए भेजा गया। यहीं से उसकी जिंदगी धीरे-धीरे अलग रास्ते पर मुड़ने लगी।
पढ़ाई छूटी, निजी जिंदगी आगे निकल गई
कोचिंग के दौरान आयुष का ध्यान पढ़ाई से हटकर दोस्तों और निजी रिश्तों में लगने लगा। इसी दौरान उसकी एक लड़की से नजदीकियां बढ़ीं, जो आगे चलकर प्रेम संबंध में बदल गईं। गांव वालों के अनुसार, इसके बाद वह अक्सर घर लौटने लगा और पढ़ाई पीछे छूटती चली गई।
पिता की आत्महत्या के बाद भी नहीं बदला रुख
2017 में पिता की आत्महत्या ने परिवार को गहरा झटका दिया। यह वह समय था जब जिम्मेदारियां बढ़नी चाहिए थीं लेकिन गांव के लोगों का कहना है कि आयुष का व्यवहार इसके उलट होता गया।
15 बीघा जमीन का सौदा—मजबूरी या फैसला?
पिता के जाने के कुछ ही समय बाद आयुष ने अपने हिस्से की जमीन बेचना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे करीब 15 बीघा जमीन बिक गई। यही जमीन बाद में उसकी ‘मजबूरी वाली कहानी’ का हिस्सा बनी, जिसे उसने गिरवी बताया लेकिन अब सामने आ रहा है कि जमीन गिरवी नहीं रखी गई थी, बल्कि खुद बेची गई और पैसों का इस्तेमाल अलग तरीके से हुआ।
एयर होस्टेस से रिश्ता, फिर जल्द ही दूरी
इस दौरान उसकी जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ आया, शादी। बताया जाता है कि यूपी की एक एयर होस्टेस से उसका रिश्ता बना। 2018 में वह उसे गांव लेकर आया और कुछ समय बाद देवघर जाकर शादी कर ली। हालांकि यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया। करीब तीन महीने बाद दोनों अलग हो गए और पत्नी वापस नहीं लौटी।
खर्चीली जिंदगी और टूटता पारिवारिक रिश्ता
गांव वालों के मुताबिक, जमीन बेचकर मिले पैसे दोस्तों, घूमने-फिरने और खर्चीली जिंदगी में खर्च हो गए। वह गांव में पढ़ाई का हवाला देता रहा, जबकि असलियत अलग थी। 2021 के बाद उसने गांव आना लगभग बंद कर दिया। एक बार लौटा तो छोटे भाई ने उसे घर में रहने से मना कर दिया अब उसकी मां गांव में अकेली रहती हैं।
अब जांच के घेरे में पूरी कहानी
किडनी बेचने की कहानी में आर्थिक तंगी, पढ़ाई का दबाव और जमीन गिरवी जैसे कई पहलू सामने आए थे लेकिन नई जानकारी ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वह सच में मजबूर था? क्या उसने सच्चाई छुपाकर कहानी को अलग रूप दिया? ये सभी सवाल अब जांच का हिस्सा बन चुके हैं।
मां का जिक्र आते ही बदल जाता है रवैया
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आयुष बार-बार यह कहता है कि उसकी मां इस सच्चाई को सह नहीं पाएंगी। वह चाहता है कि परिवार तक पूरी बात न पहुंचे।




