The Red Ink: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के एक बयान ने वैश्विक सियासत में नया भूचाल ला दिया है। होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ट्रंप की आक्रामक चेतावनी और उसमें इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा अब उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाओं का कारण बन गई है।
‘खोलो वरना भुगतो’- ट्रंप की सीधी धमकी
रविवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए Donald Trump ने ईरान को चेतावनी दी कि होर्मुज़ स्ट्रेट तुरंत खोला जाए, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर विवाद और भी गहरा गया है।
ईरान का पलटवार: “अमेरिका पाषाण युग में पहुंच चुका”
थाईलैंड में मौजूद ईरानी दूतावास ने ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए कहा “जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति बच्चों की तरह गालियां दे रहे हैं, उससे लगता है कि अमेरिका उम्मीद से पहले ही पाषाण युग में पहुंच गया है।” वहीं पाकिस्तान में ईरान के दूतावास ने तो यहां तक कह दिया कि ट्रंप को उनके ‘असंतुलित व्यवहार’ के कारण महाभियोग चलाकर पद से हटा देना चाहिए।
अमेरिका के अंदर भी बगावत
अमेरिका के भीतर भी ट्रंप के खिलाफ आवाजें तेज हो गई हैं। डेमोक्रेटिक नेता Chuck Schumer ने तंज कसते हुए कहा “जब लोग ईस्टर मना रहे हैं, तब अमेरिका का राष्ट्रपति सोशल मीडिया पर एक बेकाबू पागल की तरह बड़बड़ा रहा है।” उन्होंने ट्रंप पर संभावित युद्ध अपराधों की धमकी देने और सहयोगियों को नाराज़ करने का आरोप लगाया।
ट्रंप के समर्थन में भी आवाज
वहीं रिपब्लिकन खेमे से Lindsey Graham ने ट्रंप का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रपति होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कूटनीति के जरिए समाधान निकल सकता है लेकिन साथ ही ईरान को “जल्दी और समझदारी से फैसला लेने” की सलाह भी दी।
पूर्व सांसद का तीखा हमला
अमेरिकी कांग्रेस की पूर्व सदस्य Marjorie Taylor Greene ने भी ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा जो लोग खुद को धार्मिक बताते हैं, उन्हें ट्रंप के इस व्यवहार पर ईश्वर से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने के पीछे अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई जिम्मेदार है।
भारत से भी आई प्रतिक्रिया
भारत में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद Manoj Jha ने अमेरिकी जनता से सवाल करते हुए लिखा “क्या इस तरह की बयानबाज़ी आपको स्वीकार है? जब गंभीर मुद्दे तमाशा बन जाएं, तो यह ताकत नहीं बल्कि जिम्मेदारी से भागना होता है।” उन्होंने कहा कि राजनीति का मूल संयम, तर्क और जवाबदेही होना चाहिए, न कि सिर्फ शोर।
बदलती डेडलाइन, बदलते बयान
ईरान को लेकर ट्रंप के रुख में लगातार बदलाव भी सवालों के घेरे में है। ट्रम्प ने 21 मार्च को 48 घंटे में स्ट्रेट न खुला तो हमले की धमकी, कुछ दिन बाद बातचीत का हवाला देकर 5 दिन की मोहलत, 27 मार्च को डेडलाइन बढ़ाकर 10 दिन किया, अब 6 अप्रैल तक की अंतिम चेतावनी, फिर 48 घंटे की नई धमकी। इन लगातार बदलती समयसीमाओं ने उनकी रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मैक्रों की नसीहत “यह कोई तमाशा नहीं”
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भी ट्रंप के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा “यह युद्ध और शांति का सवाल है, कोई तमाशा नहीं- गंभीर बनें, रोज़-रोज़ बयान न बदलें।”
वैश्विक तनाव चरम पर
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते ट्रंप के बयानों ने हालात और जटिल कर दिए हैं। एक तरफ कड़ी चेतावनियां हैं, तो दूसरी तरफ कूटनीति की उम्मीद लेकिन दुनिया की नजर अब इस पर टिकी है कि अगला कदम क्या होगा।




