The Red Ink: आज भारतीय राजनीति में अगर किसी एक पार्टी का सबसे ज्यादा दबदबा दिखता है, तो वह भारतीय जनता पार्टी है लेकिन यह ताकत एक दिन में नहीं बनी। 1980 में जन्मी इस पार्टी ने हार, प्रयोग, आंदोलन और बड़े फैसलों के जरिए खुद को इस मुकाम तक पहुंचाया है। यह कहानी सिर्फ एक पार्टी की नहीं, बल्कि भारत की बदलती राजनीति की कहानी भी है।
शुरुआत जनसंघ से, BJP तक का सफर
BJP की जड़ें 1951 में बने भारतीय जनसंघ में हैं, जिसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने खड़ा किया था। आपातकाल के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ लेकिन ‘दोहरी सदस्यता’ विवाद के चलते 6 अप्रैल 1980 को नई पार्टी बनी BJP। उस वक्त Atal Bihari Vajpayee ने जो कहा “अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा”, वही आने वाले दशकों का राजनीतिक संकेत बन गया।
1984: जब BJP लगभग खत्म हो गई थी
1984 का चुनाव पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका था जिसमे बीजेपी को सिर्फ 2 सीटें ही मिली थी। यहीं से BJP ने अपनी दिशा बदली। ‘गांधीवादी समाजवाद’ को छोड़कर पार्टी ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को अपना मुख्य आधार बनाया।
राम मंदिर आंदोलन: पहचान से ताकत तक
1989 में पालमपुर प्रस्ताव के जरिए BJP ने राम जन्मभूमि आंदोलन को खुलकर समर्थन दिया। इस फैसले ने पार्टी को एक नई पहचान दी और सीटें 2 से बढ़कर 86 तक पहुंच गईं।
रथ यात्रा: राजनीति का टर्निंग पॉइंट
1990 में Lal Krishna Advani की सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा ने सियासत की दिशा बदल दी। BJP अब सिर्फ संगठन नहीं, जन आंदोलन बन चुकी थी।
1996: सत्ता की पहली झलक
1996 में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन सरकार सिर्फ 13 दिन चली। फिर भी यह साफ हो गया देश में कांग्रेस का विकल्प तैयार है।
NDA दौर: गठबंधन से गवर्नेंस तक
1998 से 2004 के बीच BJP ने 24 से ज्यादा दलों के साथ मिलकर NDA बनाया। पोखरण परमाणु परीक्षण, कारगिल युद्ध और स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी योजनाओं ने पार्टी की छवि बदल दी अब यह सिर्फ विचारधारा नहीं, गवर्नेंस की पार्टी बन चुकी थी।
2004 के बाद: अंदरूनी संघर्ष और बदलाव
2004 और 2009 की हार के बाद पार्टी में नेतृत्व को लेकर सवाल उठे। आडवाणी के ‘जिन्ना बयान’ के बाद वैचारिक बहस तेज हुई और धीरे-धीरे नया नेतृत्व उभरने लगा।
2013: एक चेहरे पर दांव
गोवा अधिवेशन में Narendra Modi को चुनाव अभियान की कमान सौंपी गई। यहीं से BJP ने ‘कलेक्टिव लीडरशिप’ से हटकर एक मजबूत चेहरे पर दांव लगाया।
2014: राजनीति का बड़ा उलटफेर
2014 में BJP ने 30 साल बाद पूर्ण बहुमत हासिल किया। पार्टी अब उत्तर भारत तक सीमित नहीं रही दक्षिण और पूर्वोत्तर तक विस्तार हो गया।
2019 और आगे: नया राजनीतिक मॉडल
2019 की जीत ने यह साफ कर दिया कि BJP का आधार अब सिर्फ हिंदुत्व नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद + लाभार्थी वर्ग का मजबूत कॉम्बिनेशन है। इसके बाद धारा 370 हटाना और राम मंदिर निर्माण जैसे फैसलों ने पार्टी के कोर एजेंडे को जमीन पर उतार दिया। 2024 में सीटें कम होने के बावजूद लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी, यह अपने आप में ऐतिहासिक रहा।
सिर्फ पार्टी नहीं, एक पॉलिटिकल मशीन
46 साल में BJP ने खुद को विपक्ष की पार्टी से बदलकर सत्ता के केंद्र में स्थापित किया है। यह सफर बताता है कि रणनीति, संगठन और नेतृत्व कैसे मिलकर राजनीति की दिशा बदल सकते हैं।




