The Red Ink
राजधानी लखनऊ में एक बार फिर सियासत सड़कों पर उतर आई है। समाजवादी पार्टी ने पोस्टरों के जरिए NDA पर सीधा हमला बोलते हुए राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। सपा कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है और आने वाले चुनावी समीकरणों की आहट भी दे दी है।
पोस्टरों से सियासी हमला
सपा कार्यकर्ताओं गुफरान कुरैशी और विकास यादव द्वारा लगाए गए पोस्टरों में “बढ़ता PDA, घटता NDA” का नारा प्रमुखता से उभरा है। इसके साथ ही “अबकी बार PDA की सरकार” का संदेश भी दिया गया है। इन पोस्टरों के जरिए सपा ने साफ कर दिया है कि वह पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समीकरण के सहारे NDA को चुनौती देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
बिहार का असर, यूपी में सियासी हलचल
बिहार में Samrat Choudhary को नेता बनाए जाने के बाद बदले सियासी समीकरणों की गूंज अब उत्तर प्रदेश तक पहुंचती दिख रही है। लखनऊ में पोस्टर वॉर को इसी बड़े राजनीतिक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
PDA बनाम NDA- सीधी लड़ाई का संकेत
पोस्टरों के जरिए सपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आने वाले समय में राजनीति PDA बनाम NDA की सीधी लड़ाई में तब्दील हो सकती है। पार्टी लगातार इस सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में जुटी है और पोस्टर वॉर उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
चुनावी माहौल की शुरुआती झलक
लखनऊ में पोस्टर के जरिए छिड़ी यह जंग इस बात का संकेत है कि चुनावी माहौल बनने से पहले ही दलों ने अपनी रणनीति को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है। सियासी गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि यह पोस्टर वॉर आने वाले बड़े राजनीतिक टकराव की भूमिका बन सकता है।




