The Red Ink
Lashkar-e-Taiba से जुड़े आतंकी Umar Hasim alias Khargosh को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि उसने जयपुर पासपोर्ट कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाया और उसी के आधार पर देश छोड़कर फरार हो गया। इस पूरे मामले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फर्जी पासपोर्ट के सहारे विदेश फरार
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आतंकी ने जयपुर में जाली दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट हासिल किया। इसी पासपोर्ट के जरिए वह पहले इंडोनेशिया और फिर खाड़ी देशों की ओर निकल गया। फिलहाल उसके Saudi Arabia में छिपे होने की आशंका जताई जा रही है।
ATS की कार्रवाई, 4 संदिग्ध हिरासत में
मामला सामने आते ही Rajasthan ATS हरकत में आई और इस नेटवर्क से जुड़े चार लोगों को डिटेन किया गया है। इनमें वह शख्स भी शामिल है जिसने पासपोर्ट बनवाने में मदद की, साथ ही उसे पनाह देने और नौकरी दिलाने वाले लोग भी जांच के घेरे में हैं। एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया है, जो उसका करीबी बताया जा रहा है और उसके साथ नेपाल गया था। एजेंसियां इन सभी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही हैं।
एक साल तक जयपुर में रहा, भनक तक नहीं लगी
जांच में यह भी सामने आया है कि उमर हासिम करीब एक साल तक जयपुर में रहा और सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस दौरान वह शहर की चारदीवारी इलाके में रह रहा था और एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान में काम करता था, जहां वह AC और अन्य उपकरणों की मरम्मत करता था। बताया जा रहा है कि वह इस दौरान भीड़भाड़ वाले स्थानों, मंदिरों और पर्यटन स्थलों पर भी जाता रहा।
शादी और फर्जी पहचान का इस्तेमाल
सूत्रों के अनुसार, उसने जयपुर में नहीं बल्कि श्रीनगर में अपने एक अंडरग्राउंड नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति की बेटी से शादी की थी। उसी आधार पर उसने दस्तावेज तैयार कर जयपुर में पासपोर्ट बनवाया। यहां उसने ‘सहजाद’ नाम से फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया।
श्रीनगर से राजस्थान तक फैला नेटवर्क
इस मामले की कड़ियां तब जुड़ीं जब Srinagar में लश्कर-ए-तैयबा के एक मॉड्यूल का खुलासा हुआ। जांच आगे बढ़ी तो इसके तार राजस्थान से भी जुड़ते मिले। सूत्रों के मुताबिक, उमर हासिम 2012 में पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर आया था और वहां संगठन को मजबूत करने में लगा रहा। बाद में उसने राजस्थान, पंजाब और हरियाणा तक अपना नेटवर्क फैलाया। वह पाकिस्तानी आतंकी अबु हुरैरा के संपर्क में था और लश्कर प्रमुख Hafiz Saeed को जानकारी देता था।
हरियाणा से जयपुर तक मूवमेंट
जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि जयपुर आने से पहले वह हरियाणा के नूंह (मेवात) इलाके में भी रह चुका था।
सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
पूरे मामले ने पासपोर्ट वेरिफिकेशन और सुरक्षा जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना सही जांच के मकान किराए पर मिलना और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनना सुरक्षा चूक मानी जा रही है। फिलहाल ATS और अन्य एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं। पूछताछ के बाद इस पूरे मॉड्यूल और सिस्टम में हुई सेंध के बारे में और खुलासे होने की संभावना है।




