The Red Ink
बिहार की राजनीति में एक अहम मोड़ उस वक्त देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक में भावुक संबोधन दिया। करीब छह मिनट के इस संबोधन में उन्होंने साल 2005 से अब तक के अपने पूरे कार्यकाल को याद करते हुए कहा “जहां तक मुझसे हो सका, मैंने बिहार के लिए किया।” यह संबोधन सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि उसमें एक लंबा राजनीतिक सफर, जिम्मेदारियों का बोझ और विदाई की भावनाएं साफ झलक रही थीं।
20 साल का सफर, एक भावुक विराम
कैबिनेट बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने अपने शासनकाल की उपलब्धियों और योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार को विकास की नई दिशा देने की लगातार कोशिश की गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी राज्य की विकास योजनाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी। उनके शब्दों में एक संतुलित संदेश था बीते काम का आत्ममूल्यांकन और भविष्य के लिए उम्मीद।
‘नई सरकार को भी देता रहूंगा मार्गदर्शन’
अपने संबोधन में नीतीश कुमार ने साफ किया कि भले ही सत्ता में बदलाव हो, लेकिन वे नई सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रगति का सिलसिला जारी रहना चाहिए और नई सरकार जनता के हित में काम करे। यह बयान राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके भविष्य की भूमिका को लेकर संकेत मिलते हैं।
कैबिनेट में भावुक माहौल, कई नेताओं की आंखें नम
बैठक के बाद सियासी गलियारों में एक भावनात्मक माहौल देखने को मिला। मंत्रियों और विधायकों ने नीतीश कुमार के योगदान को याद करते हुए उन्हें बिहार का मार्गदर्शक बताया। राज्य मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि यह दिन भावनात्मक और गर्व से भरा है, जबकि मंत्री रामकृपाल यादव ने इसे “हर किसी के लिए भावुक क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी का आभार जताया और बिहार के लिए उनके काम को भुलाया नहीं जा सकता। वहीं, बीजेपी विधायक लाखेंद्र कुमार रौशन ने कहा कि नीतीश कुमार ने भरोसा दिलाया है कि वे आगे भी सरकार को दिशा देते रहेंगे। जदयू नेता मोहम्मद जमा खान ने भी कहा कि बिहार की जनता उन्हें हमेशा याद रखेगी।
अंतिम कैबिनेट के साथ सत्ता परिवर्तन का काउंटडाउन
नीतीश कुमार ने 11:30 बजे कैबिनेट बैठक की, जिसे उनके कार्यकाल की आखिरी बैठक माना जा रहा है। बैठक में कोई एजेंडा पास नहीं किया गया और प्रेस ब्रीफिंग भी रद्द कर दी गई। बैठक के बाद कैबिनेट भंग करने की सिफारिश कर दी गई। जानकारी के मुताबिक, वे आज दोपहर 3:15 बजे इस्तीफा दे सकते हैं। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है।
बदलते दौर का संकेत
नीतीश कुमार का यह संबोधन सिर्फ एक विदाई भाषण नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक युग के विराम का संकेत माना जा रहा है। उनके शब्दों में जहां एक तरफ संतोष था, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदारियों को आगे सौंपने का भाव भी साफ दिखा।




