The Red Ink: 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही का ‘इस्तीफा’ दरअसल इस्तीफा नहीं बल्कि सिस्टम के भीतर संघर्ष कर रहे एक अफसर की मदद की पुकार है। खुद राही ने साफ किया है कि उन्होंने जो कदम उठाया है, वह निराशा में लिया गया फैसला नहीं बल्कि एक “request for help” है।
रिंकू सिंह राही ने सरकार को तीन पत्र लिखकर समर्थन मांगा है और कहा है कि उन्हें सिस्टम के भीतर काम करने का अवसर नहीं दिया जा रहा। उन्होंने ‘टेक्निकल रेजिग्नेशन’ की मांग की है, जो आम तौर पर किसी अधिकारी को सरकारी सेवा में बने रहने की अनुमति देता है।
‘दो सिस्टम चल रहे हैं, एक पॉजिटिव और एक पैरेलल’
राही ने कहा कि असली समस्या सिस्टम के भीतर एक ‘पैरेलल सिस्टम’ के उभरने की है, जो काम करने में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। उनके मुताबिक, “यह कोई साधारण इस्तीफा नहीं है, न ही मैं हताश हूं। मुझे सिस्टम पर पूरा भरोसा है लेकिन समस्या यह है कि यहां दो सिस्टम हैं एक पॉजिटिव और एक पैरेलल। जहां भी मेरी पोस्टिंग होगी, मुझे इस पैरेलल सिस्टम से लड़ना पड़ेगा, वो भी बिना किसी सपोर्ट के।” उन्होंने यह भी कहा कि जब तक पॉजिटिव सिस्टम को पर्याप्त समर्थन नहीं मिलेगा, तब तक हालात नहीं बदलेंगे।
‘काम करना चाहता हूं… लेकिन मौका नहीं दिया जा रहा’
अपने पत्रों में राही ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि उन्हें काम करने के अवसर ही नहीं दिए जा रहे। उन्होंने लिखा कि शाहजहांपुर में पोस्टिंग के पहले ही दिन जब उन्होंने सफाई से जुड़ी अनियमितताओं पर कार्रवाई की, तो उन्हें बिना पक्ष रखने का मौका दिए हटा दिया गया और ट्रांसफर कर दिया गया। राही का कहना है कि “वर्तमान सिस्टम में काम करने की इच्छा होने के बावजूद मुझे सार्थक योगदान देने का अवसर नहीं मिल रहा, जिससे संवैधानिक मूल्यों के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो जाता है।”
‘No Work-No Pay’ की मांग भी की
रिंकू सिंह राही ने अपने पत्रों में यह भी अनुरोध किया कि उन्हें उस अवधि का वेतन न दिया जाए, जब उन्हें काम नहीं दिया गया। एक पत्र में उन्होंने लिखा, “29.09.2025 के मेरे अनुरोध पत्र पर निर्णय लिया जाए, जिसमें अगस्त और सितंबर 2025 का वेतन ‘No Work-No Pay’ सिद्धांत के तहत न लेने की बात कही गई है।”
भ्रष्टाचार उजागर किया, फिर झेला जानलेवा हमला
राही का संघर्ष नया नहीं है वह 2004 से उत्तर प्रदेश में PCS अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे थे। 2008 में जब वह जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर थे, तब उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं में भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। इसके बाद मार्च 2009 में उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें सात गोलियां मारी गईं। इस हमले में उनका चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, एक आंख की रोशनी चली गई और जबड़ा भी टूट गया। उन्हें एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
धमकियों का आरोप… लेकिन कार्रवाई नहीं
राही ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली पोस्टिंग्स में उन्हें लगातार धमकियों का सामना करना पड़ा, यहां तक कि जानलेवा हमला भी हुआ लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
UP से लेकर UPSC तक का सफर
हाथरस जिले के रहने वाले रिंकू सिंह राही ने 2021 में दिव्यांग कोटा के तहत UPSC परीक्षा पास की और 2022 में IAS अधिकारी बने।
सिस्टम में ‘पैरेलल सिस्टम’ कौन चला रहा है?
रिंकू सिंह राही के आरोप सिर्फ एक अधिकारी की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं बल्कि सिस्टम के भीतर मौजूद उस ‘पैरेलल स्ट्रक्चर’ की ओर इशारा करते हैं, जिस पर अक्सर चर्चा तो होती है लेकिन कार्रवाई कम दिखती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस “मदद की पुकार” को कैसे लेती है एक अफसर की व्यक्तिगत समस्या के तौर पर या सिस्टम में सुधार की चेतावनी के रूप में।




