“मां ने ही छीन ली बेटी की सांसें…” बेटे को बचाने की चाह में 12 साल की मासूम की ‘नरबलि’

The Red Ink: कभी जिस मां की उंगली पकड़कर एक बेटी चलना सीखती है, उसी मां के हाथों अगर उसकी सांसें छिन जाएं, तो ये सिर्फ हत्या नहीं होती ये भरोसे का कत्ल होता है। झारखंड के Hazaribagh के एक छोटे से गांव से आई ये कहानी ऐसी ही एक सच्चाई है, जो दिल को भीतर तक तोड़ देती है।

एक रात… और सब खत्म
24 मार्च की वो तारीख जब 12 साल की एक बच्ची अचानक गायब हो गई। घर में बेचैनी थी, गांव में तलाश चल रही थी लेकिन अगले दिन जो मिला, उसने हर उम्मीद तोड़ दी। गांव की झाड़ियों में उसी बच्ची का शव पड़ा था खामोश, बेजान।

जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा था… वही बन गई कातिल
जांच शुरू हुई, शक के घेरे बने लेकिन जो सच सामने आया, उसने सबको सन्न कर दिया। बच्ची की हत्या किसी बाहरी ने नहीं उसकी अपनी मां ने करवाई थी। पुलिस ने मां रेशमी देवी, गांव की शांति देवी और भीमराम नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि भीमराम, रेशमी देवी का प्रेमी है।

अंधविश्वास ने मां से छीन ली इंसानियत
रेशमी देवी का बेटा बीमार था एक मां की बेचैनी उसे इलाज तक ले जाती है लेकिन यहां वो उसे अंधविश्वास के रास्ते पर ले गई। वो पहुंची गांव की एक कथित तांत्रिक शांति देवी के पास और यहीं से शुरू हुआ वो खौफनाक सिलसिला। शांति देवी ने कथित तौर पर कहा- “अगर समस्या खत्म करनी है… तो कुंवारी बेटी की बलि देनी होगी।” मां ने इस बात पर यकीन कर लिया।

मौत की वो रात… जब बेटी ने शायद मां को ही पुकारा होगा
24 मार्च को मां अपनी बेटी को बहाने से शांति देवी के घर ले गई। पुलिस के मुताबिक मां ने खुद बेटी के हाथ-पैर पकड़े, भीमराम ने गला घोंटा और फिर सिर पर पत्थर मारकर उसे हमेशा के लिए चुप करा दिया गया। सोचिए उस वक्त वो बच्ची क्या सोच रही होगी? क्या उसने आखिरी बार “मां” कहा होगा?

झूठ की कहानी भी मां ने ही लिखी
हत्या के बाद आरोपी फरार हो गए लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात मां ने खुद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और शक किसी और पर जताया पर सच ज्यादा देर छुप नहीं सका टेक्निकल और फॉरेंसिक सबूतों ने पूरी साजिश खोल दी।

पुलिस की जांच और सख्त कार्रवाई
DIG Anjani Jha के मुताबिक “इस घटना में परिवार की तरफ से कोई साफ बयान नहीं दिया गया। ना ही कोई चश्मदीद है। टेक्निकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स के आधार पर आरोपियों को पकड़ा गया। बहुत जल्द हम चार्जशीट फाइल करेंगे।”

एक सवाल… जो रह गया
एक मां जो अपने बेटे को बचाना चाहती थी क्या उसने ये सोचा कि वो क्या खो रही है? एक बेटी की जान, एक मासूम का भरोसा और इंसानियत की आखिरी सीमा।

ये सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं है ये उस अंधविश्वास की कहानी है, जो इंसान को इंसान नहीं रहने देता। जहां इलाज की जगह तंत्र-मंत्र चुन लिया जाता है और जिंदगी की जगह मौत।

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