The Red Ink: SIR प्रक्रिया का असर पार्टी पर ही भारी, कम अंतर वाली सीटों पर बढ़ी चिंता अंदरखाने तेज हुआ मंथन…
लखनऊ: सियासत के बीच संगठन पर सवाल
उत्तर प्रदेश में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर एक नई तरह की हलचल पैदा कर दी है। जो प्रक्रिया चुनावी मजबूती का जरिया मानी जा रही थी, वही अब पार्टी के लिए चिंता का कारण बनती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस पूरी कवायद में हुई खामियों का सीधा असर खुद बीजेपी की चुनावी स्थिति पर पड़ सकता है।
कम अंतर वाली सीटों पर खतरे की घंटी
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 100 से अधिक सीटें बेहद कम अंतर से जीती थीं। ऐसे में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटने की खबर ने पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है। बताते चलें कि प्रदेशभर में करीब 2 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो चुके हैं, जो आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
बूथ स्तर पर कमजोरी उजागर
इस पूरे मुद्दे में सबसे ज्यादा सवाल संगठन की सक्रियता को लेकर उठ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार कार्यकर्ताओं और संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए थे लेकिन बूथ स्तर पर अपेक्षित काम नहीं हो पाया। यही वजह है कि वोटर लिस्ट अपडेट की प्रक्रिया में पार्टी की पकड़ कमजोर नजर आई।
प्रक्रिया को लेकर गलतफहमी भी बनी वजह
विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने SIR प्रक्रिया को केवल सरकारी काम मान लिया। जबकि भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार इसमें राजनीतिक दलों की भी अहम भूमिका होती है। खासतौर पर बूथ लेवल एजेंट (BLA) की नियुक्ति में कमी ने इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया।
विपक्ष के समीकरण भी बदले
शुरुआती दौर में समाजवादी पार्टी को यह आशंका थी कि SIR प्रक्रिया से बीजेपी को फायदा मिलेगा लेकिन अब तस्वीर उलटती नजर आ रही है। विपक्ष का मानना है कि बीजेपी की अपनी संगठनात्मक कमजोरियों ने उसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, जिससे राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।
सिर्फ सत्ता नहीं, संगठन भी जरूरी
यह पूरा घटनाक्रम बीजेपी के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि केवल सरकार में होना ही पर्याप्त नहीं है। मजबूत संगठन और जमीनी नेटवर्क उतना ही अहम है। आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा पार्टी के लिए चेतावनी भी है और सुधार का मौका भी।




