रूस में था युवक, बिहार में दर्ज हो गई FIR! किशनगंज पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल

The Red Ink

बिहार के किशनगंज जिले में नीट प्रदर्शन से जुड़े एक मामले ने पुलिस की जांच और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहादुरगंज निवासी मोहम्मद सदाकत का दावा है कि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद दर्ज मुकदमे में उनका नाम आरोपी के तौर पर शामिल कर दिया गया।

अब रूस से युवक का वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि अगर वह घटना के समय भारत में ही नहीं था, तो उसे एफआईआर में किस आधार पर नामजद किया गया? क्या नाम जोड़ने से पहले उसकी मौजूदगी और तथ्यों की जांच की गई थी?

रूस से वीडियो जारी कर युवक ने कहा— मैं प्रदर्शन में था ही नहीं

मोहम्मद सदाकत ने रूस से वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि वह करीब चार महीने से रूस में हैं। उन्होंने दावा किया कि 24 तारीख को बहादुरगंज में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शन के दौरान वह भारत में मौजूद नहीं थे।

सदाकत ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनके विदेश में होने के दस्तावेजों की जांच के बाद एफआईआर से नाम हटाने की मांग की। उनका कहना है कि जब वह घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे, तो प्रदर्शन या किसी कथित उपद्रव में शामिल होने का सवाल कैसे उठ सकता है।

बिना जांच नाम जोड़ने का आरोप, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

यह मामला बहादुरगंज में नीट आंदोलन के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन और कथित उपद्रव के बाद दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी और कई लोगों को आरोपी बनाया गया।

हालांकि, रूस में मौजूद होने का दावा करने वाले युवक का नाम एफआईआर में सामने आने के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान तथ्यों की पर्याप्त पड़ताल किए बिना कई नाम मुकदमे में शामिल कर दिए गए।

यदि युवक का दावा सही साबित होता है, तो यह केवल एक व्यक्ति के गलत तरीके से मुकदमे में फंसने का मामला नहीं होगा, बल्कि एफआईआर दर्ज करने से पहले की गई जांच की गंभीर खामियों को भी सामने लाएगा।

स्थानीय जनप्रतिनिधि ने कहा— पहले जांच होती, फिर नाम दर्ज होते

बहादुरगंज के जिला परिषद प्रतिनिधि इमरान आलम ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उपद्रव की घटना के बाद पर्याप्त जांच किए बिना कई स्थानीय लोगों के नाम मुकदमे में जोड़ दिए गए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी साजिश या आपराधिक गतिविधि की आशंका थी, तो पुलिस को पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए थी। किसी व्यक्ति को आरोपी बनाने से पहले उसकी भूमिका और घटना के समय उसकी मौजूदगी की पुष्टि जरूरी थी।

उनके मुताबिक, रूस में रह रहे युवक का नाम एफआईआर में शामिल होने का दावा पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

AIMIM विधायक ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय AIMIM विधायक तौसीफ आलम ने भी मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान किए बिना स्थानीय लोगों के नाम मुकदमे में जोड़ दिए गए।

विधायक ने कहा कि यदि युवक वास्तव में घटना के समय रूस में था, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होना जांच में बड़ी चूक का संकेत हो सकता है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

पुलिस बोली— मामले की जानकारी मिली, जांच के बाद होगी कार्रवाई

इस मामले पर प्रभारी एसपी हरिमोहन शुक्ला ने कहा कि उन्हें युवक के दावे की जानकारी मिली है। उनके अनुसार, मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि युवक के विदेश में होने के दावे समेत सभी तथ्यों की जांच की जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुकदमे वापस लेने के फैसले से मिल सकती है राहत

छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और बिहार सरकार के फैसले का भी इस मामले पर असर पड़ सकता है। बिहार सरकार के गृह विभाग ने ऐसे मामलों को वापस लेने की घोषणा की है।

ऐसे में मोहम्मद सदाकत के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर भी राहत की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, युवक के रूस में होने के दावे की जांच और एफआईआर में उसका नाम शामिल होने के आधार को लेकर सवाल अब भी बने हुए हैं।

सवाल अब भी वही— बिना मौजूदगी की पुष्टि के कैसे दर्ज हुआ नाम?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी व्यक्ति को आरोपी बनाने से पहले पुलिस ने उसकी मौजूदगी, यात्रा रिकॉर्ड या अन्य तथ्यों की जांच की थी या नहीं। अगर जांच के बाद युवक का दावा सही पाया जाता है, तो यह मामला पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

किसी निर्दोष व्यक्ति का नाम एफआईआर में दर्ज होना केवल कानूनी परेशानी नहीं पैदा करता, बल्कि उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा, परिवार और भविष्य पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में अब सबकी नजर पुलिस जांच पर है कि रूस में होने का दावा करने वाले युवक के मामले में सच्चाई क्या सामने आती है और कथित लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

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