संसद में हाईलेवल बैठक, राज्यसभा में परीक्षा कानून पर बहस; छात्र आंदोलन को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

The Red Ink

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संसद परिसर में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल शामिल हुए।

बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल मौजूद रहे।

हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा शुरू

एक ओर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में शीर्ष स्तर की बैठक चल रही थी, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई।

केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक को विचार और पारित करने के लिए सदन में पेश किया। इससे पहले यह विधेयक बुधवार को लोकसभा से पारित हो चुका है।

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ कानूनी व्यवस्था को और मजबूत करना है।

पेपर लीक पर कड़ी सजा और तेज सुनवाई का प्रावधान

विधेयक में परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और अनुचित साधनों के इस्तेमाल के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े अपराधों में सजा बढ़ाने, जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने और मामलों की समयबद्ध सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की योजना है।

सरकार का मानना है कि इन प्रावधानों से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और संगठित पेपर लीक नेटवर्क पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक पर भी होगी चर्चा

राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर भी चर्चा प्रस्तावित है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में इस विधेयक पर विचार करने का प्रस्ताव रखेंगे। यह विधेयक पहले राज्यसभा से पारित हो चुका है और अब इसके आगे की संसदीय प्रक्रिया पर चर्चा की जानी है।

छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष का विरोध

संसद की कार्यवाही के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बना हुआ है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। विपक्ष इस मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने और विस्तृत जांच कराने की मांग कर रहा है।

राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र और उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाई जानी चाहिए।

मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।

विपक्षी नेताओं ने यह जानने की मांग की कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई का आदेश किस स्तर से दिया गया था। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए नारे भी लगाए गए।

विपक्ष ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को मिले दान में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और PM मोदी से माफी की मांग

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।

उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में स्पष्ट बयान दे। साथ ही, विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई पर माफी मांगने की मांग भी की है।

अमित शाह की गैरमौजूदगी पर उठाए सवाल

सैयद नसीर हुसैन ने संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। ऐसे में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री को संसद में जवाब देना चाहिए।

विपक्ष का कहना है कि इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की जरूरत है।

परीक्षा कानून और छात्र आंदोलन के बीच बढ़ी सियासी गर्मी

संसद में एक तरफ परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों को रोकने के लिए कानून को सख्त बनाने पर चर्चा हो रही है, जबकि दूसरी ओर छात्र आंदोलन और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।

अब सबकी नजर राज्यसभा में विधेयक पर होने वाली चर्चा और सरकार की ओर से छात्र आंदोलन से जुड़े सवालों पर दिए जाने वाले जवाब पर रहेगी।

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