Raksha Bandhan के मौके पर वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में आस्था और परंपरा का खास रंग देखने को मिल रहा है। सावन पूर्णिमा पर मंगला आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ को सबसे पहले राखी अर्पित की गई। इसके साथ ही बाबा का फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को राखी चढ़ाने और दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।
रक्षाबंधन के दिन काशी विश्वनाथ धाम में बाबा के दर्शन का अपना अलग महत्व है। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह के बाहर निर्धारित व्यवस्था के तहत जलाभिषेक और दर्शन कराया जा रहा है। सावन के अंतिम दिन पड़ रहे त्योहार को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
Raksha Bandhan पर बाबा विश्वनाथ को सबसे पहले बांधी गई राखी
मंगला आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ को महादेव स्वरूप का रक्षाबंधन बांधा गया। इसके बाद भगवान का फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा के इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों में खास उत्साह दिखाई दे रहा है।
कई महिलाएं बाबा को राखी अर्पित करने के लिए मंदिर पहुंच रही हैं। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रशासन ने प्रवेश और दर्शन की व्यवस्था तय कर रखी है, ताकि भीड़ के बीच लोगों को परेशानी न हो।
शाम को सपरिवार झूले पर विराजेंगे बाबा विश्वनाथ
रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार शाम बाबा विश्वनाथ सपरिवार झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इसके लिए टेढ़ी नीम स्थित पूर्व महंत आवास से बाबा की पंचबदन चल रजत प्रतिमा की पालकी यात्रा निकाली जाएगी।
पालकी यात्रा धार्मिक अनुष्ठानों और गाजे-बाजे के साथ काशी विश्वनाथ धाम पहुंचेगी। इसके बाद बाबा विश्वनाथ के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय को भी झूले पर विराजमान कराया जाएगा।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभूशरण के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन सप्तऋषि आरती से पहले बाबा की चल रजत प्रतिमा का झूलनोत्सव कराया जाएगा। इसके बाद बाबा अपने परिवार के साथ झूले पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
करीब छह घंटे तक होंगे विशेष दर्शन
मंदिर प्रशासन के मुताबिक बाबा के सपरिवार झूले वाले स्वरूप के दर्शन का सिलसिला शयन आरती तक चलेगा। इस दौरान करीब छह घंटे तक श्रद्धालुओं को बाबा की विशेष झांकी के दर्शन का अवसर मिलेगा।
काशी में इस झूलनोत्सव की परंपरा काफी पुरानी है।
इसके तहत टेढ़ी नीम स्थित पूर्व महंत आवास पर बाबा की पंचबदन प्रतिमा का पूजन और श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद प्रतिमा को पालकी में लेकर काशी विश्वनाथ धाम लाया जाता है।
मंदिर पहुंचने के बाद बाबा की चल रजत प्रतिमा को झूले पर विराजमान कराया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के सपरिवार स्वरूप के दर्शन करने पहुंचते हैं।
काशी विश्वनाथ धाम में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सावन पूर्णिमा और Raksha Bandhan एक साथ होने की वजह से काशी विश्वनाथ धाम में भक्तों की भीड़ बढ़ गई है। मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए निर्धारित व्यवस्था लागू की गई है। पंचद्वार से भक्तों को प्रवेश दिया जा रहा है।
भीड़ को नियंत्रित करने के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा पर भी नजर रखी जा रही है। मंदिर क्षेत्र और आसपास के इलाके में निगरानी बढ़ाई गई है। पूरे क्षेत्र की ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है।
प्रशासन की कोशिश है कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और भीड़ को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया जा सके।
अयोध्या में भगवान श्रीराम को भी बांधी गई राखी
रक्षाबंधन का पर्व अयोध्या में भी धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। श्रीरामवल्लभा कुंज में चांदी के भव्य झूले पर विराजमान भगवान श्रीराम को पुजारी हरिश्चंद्र दास ने राखी बांधी।
इससे पहले भगवान श्री सीताराम का अभिषेक किया गया और उनका विशेष श्रृंगार हुआ। भगवान को मुकुट, हार और रत्न जड़ित आभूषण पहनाए गए।
मथुरा जेल के बाहर भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं बहनें
रक्षाबंधन के मौके पर मथुरा जिला जेल के बाहर भी बड़ी संख्या में महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं।
जेल के बाहर बहनों की लंबी कतार दिखाई दी। जेल प्रशासन की ओर से जांच के बाद उन्हें अंदर प्रवेश दिया जा रहा है।
वहीं मुंबई से वाराणसी पहुंची रूपा ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और भगवान को राखी अर्पित की। वह अपने बच्चे के साथ काशी पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे का जन्मदिन भी है और इसी वजह से उन्होंने बाबा के दर्शन और पूजन के साथ यहां राखी बांधी।
काशी विश्वनाथ धाम में रक्षाबंधन के मौके पर जहां बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, वहीं शाम को होने वाला सपरिवार झूलनोत्सव श्रद्धालुओं के लिए खास अवसर होगा।




