श्रीनगर:
PoK on Independence Day को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह का बयान चर्चा में है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (PoK) की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) के उस पार के हालात देखकर उन्हें गहरा दुख और पीड़ा होती है। उन्होंने यह भी कहा कि 80 वर्ष पहले देश के नेताओं ने जो निर्णय लिया था, वह सही साबित हुआ है।
एलओसी पार के हालात पर उमर अब्दुल्लाह की टिप्पणी
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि एलओसी के उस पार रहने वाले लोग भी जम्मू-कश्मीर का हिस्सा हैं और उन्हें कभी अजनबी नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, वहां की वर्तमान परिस्थितियां इस बात का संकेत देती हैं कि इतिहास में लिए गए कुछ फैसले सही दिशा में थे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के हालात को देखकर अफसोस होता है और वहां के लोगों के लिए मन में संवेदना है।
अनुच्छेद 370 हटाने का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 5 अगस्त 2019 के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय जम्मू-कश्मीर की स्थिति में बदलाव नहीं किया गया होता, तो संभव है कि आज एलओसी पार के लोग भारत के साथ फिर से जुड़ने की मांग कर रहे होते।
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और राज्य का पुनर्गठन कर जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया था।
“PoK के लोग हमारे अपने हैं”
उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाले लोग जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि वहां के किसी भी व्यक्ति को बाहरी या अजनबी नहीं माना जा सकता।
उन्होंने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आज भी उन क्षेत्रों के लिए सीटें आरक्षित हैं। यह व्यवस्था इस उम्मीद के साथ रखी गई है कि भविष्य में वहां के लोग भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।
लोकतंत्र और संघवाद को बताया देश की ताकत
अपने संबोधन में उमर अब्दुल्लाह ने लोकतंत्र और संघवाद को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखना और हर परिस्थिति में उनकी रक्षा करना देश की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संघीय ढांचे को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि भारत की विविधता और एकता इसी व्यवस्था से मजबूती प्राप्त करती है।
राजनीतिक मायनों में अहम बयान
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उमर अब्दुल्लाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और अनुच्छेद 370 को लेकर बहस अभी भी जारी है।
एलओसी पार के हालात, PoK के लोगों के भविष्य और जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति को लेकर दिया गया उनका यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।




