The Red Ink
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के प्रस्तावित पश्चिम बंगाल दौरे पर तीखा तंज कसा है। राजभर ने कहा कि अखिलेश “गर्मी से बचते रहे” और अब एसी में बैठकर ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे।
“रैलियों से दूरी, ट्वीट से राजनीति”
राजभर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ममता बनर्जी लंबे समय से अखिलेश के दौरे का इंतजार कर रही थीं, लेकिन वह नहीं पहुंचे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भीषण गर्मी में अखिलेश घर से बाहर नहीं निकलते और रैलियों से दूरी बनाए रखते हैं। उनके मुताबिक, “दोपहर में उठकर ट्वीट करना ही उनकी राजनीति बन गई है।”
AC में मुलाकात, यूपी आने का न्योता!
राजभर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब जब अखिलेश बंगाल जाएंगे तो कोई जनसभा नहीं करेंगे, बल्कि एसी की ठंडक में बैठकर ममता बनर्जी को ढांढस बंधाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश उनसे अनुरोध करेंगे कि “जैसे पिछले चुनाव में समर्थन दिया था, वैसे ही यूपी में आकर फिर समर्थन करें।”
EVM और 2027 का राजनीतिक गणित
राजभर ने आगे आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पहले से ही 2027 की हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब सब समझ चुकी है और “सिंहासन पर जनता बैठी है”, इसलिए इस तरह के बहानों से काम नहीं चलेगा।
बंगाल चुनाव में दूरी, सोशल मीडिया पर सक्रियता
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने न तो वहां कोई रैली की और न ही दौरा किया। हालांकि, सोशल मीडिया के जरिए वह लगातार सक्रिय रहे और केंद्र सरकार व भाजपा पर निशाना साधते रहे।
ममता से मुलाकात का सियासी मतलब
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अखिलेश यादव जल्द ही कोलकाता जाकर ममता बनर्जी से मुलाकात कर सकते हैं। यह मुलाकात बंगाल चुनाव के बाद विपक्षी दलों के बीच तालमेल के लिहाज से अहम मानी जा रही है। इससे पहले जनवरी में भी अखिलेश यादव, पत्नी डिंपल यादव के साथ ममता बनर्जी से मिल चुके हैं और चुनाव में समर्थन का ऐलान कर चुके थे।
यूपी में PDA बनाम बीजेपी की जंग
इधर, अखिलेश यादव लगातार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के मुद्दे को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका दावा है कि यूपी में इस सामाजिक समीकरण के सामने भाजपा टिक नहीं पाएगी। वहीं, राजभर के ताजा हमले से साफ है कि आने वाले समय में यूपी की राजनीति और अधिक तीखी होने वाली है।
राजभर के बयान ने यूपी से लेकर बंगाल तक की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ विपक्षी एकजुटता की कोशिशें हैं, तो दूसरी ओर आपसी आरोप-प्रत्यारोप। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले सियासी तापमान और बढ़ना तय माना जा रहा है।




