The Red Ink: 8 साल के बच्चे का मुंडन कर लौट रहे थे सभी; चीखों के बीच जलती रही गाड़ी, कोई बच नहीं पाया- शव पहचान से परे…
एक खुशहाल सफर, जो मातम में बदल गया
बुधवार रात मिर्जापुर-रीवा नेशनल हाईवे पर एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। एक परिवार, जो अपने बेटे का मुंडन कराकर खुशी-खुशी लौट रहा था, कुछ ही मिनटों में आग के गोले में तब्दील हो गया। रात करीब 9:30 बजे हुए इस भीषण हादसे में कुल 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें बोलेरो सवार 9 लोग जिंदा जल गए।
कैसे मौत का जाल बना हाईवे?
पुलिस के मुताबिक, तेज रफ्तार चना लदा ट्रक अचानक ब्रेक फेल होने से बेकाबू हो गया। उसने सामने चल रही बोलेरो को टक्कर मारी। झटका इतना जोरदार था कि बोलेरो आगे चल रहे ट्रॉले से जा भिड़ी और उछलकर अलग जा गिरी। अगले ही पल तेज धमाके के साथ उसमें आग लग गई। पीछे चल रही स्विफ्ट कार भी इस चपेट में आ गई और ट्रक व ट्रॉले के बीच फंस गई।
जलती गाड़ी में फंसी चीखें, लेकिन कोई मदद नहीं
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेज थी कि बोलेरो में बैठे लोगों को बाहर निकलने का एक पल भी नहीं मिला। अंदर से चीखें सुनाई देती रहीं लोग दौड़े, बचाने की कोशिश की लेकिन लपटें इतनी भयानक थीं कि कोई पास तक नहीं पहुंच सका। कुछ ही मिनटों में पूरी गाड़ी राख में बदल गई और उसके साथ 9 जिंदगियां भी।
जिस बच्चे का मुंडन था, वही भी नहीं बचा
इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात जिस 8 साल के बच्चे का मुंडन कराकर परिवार लौट रहा था, वही बच्चा भी इस आग में समा गया। मिर्जापुर के जिगना थाना क्षेत्र के नरैना गांव का यह परिवार मैहर से लौट रहा था। हादसे में बच्चे शिवा, उसकी मां वंदना और परिवार के कई अन्य सदस्यों की जान चली गई।
पहचान से परे हो गए शव
आग इतनी भीषण थी कि शव पूरी तरह झुलस गए। हालत यह है कि कई शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया है।
बोलेरो में एक ही परिवार के 8 लोग और ड्राइवर सवार थे कोई भी जिंदा नहीं बचा।
अन्य वाहन भी बने मौत का शिकार
इस हादसे में सिर्फ बोलेरो ही नहीं, बल्कि स्विफ्ट कार का ड्राइवर और ट्रॉले का क्लीनर भी अपनी जान गंवा बैठे।
यानी कुल मिलाकर 11 लोगों की जिंदगी इस एक हादसे में खत्म हो गई।
ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर हादसे आम हैं, लेकिन इतना भयानक दृश्य उन्होंने पहली बार देखा।
एक दुकानदार ने बताया “एक साथ 9 लोगों को जलते देखा पूरा गांव दहशत में है।”
सड़क की खामियों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और शिक्षकों ने इस हादसे के लिए सड़क की बनावट और सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस मोड़ पर अक्सर हादसे होते हैं, लेकिन अब तक न तो सही साइन बोर्ड लगाए गए और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
प्रशासन और राहत कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई गई और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अपर्णा रजत कौशिक ने बताया कि सभी मृतक स्थानीय गांवों से जुड़े हैं और मामले की जांच की जा रही है।
एक हादसा जिसने सब कुछ छीन लिया
जो परिवार कुछ घंटे पहले खुशियों के साथ सफर पर निकला था, वह अब कभी घर नहीं लौटेगा। पीछे रह गई हैं सिर्फ जली हुई यादें और एक ऐसा सन्नाटा, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।




