वोटर लिस्ट से नाम गायब… ‘हम हिंदुस्तानी नहीं?’ मीर जाफ़र के वंशजों का दर्द, पहचान पर सवाल

The Red Ink: आज़ादी के 79 साल बाद, एक 89 साल का बुज़ुर्ग अपने ही देश में अपनी नागरिकता साबित करने को मजबूर है। नाम है सैय्यद आमिर मिर्ज़ा इतिहास के उस किरदार मीर जाफ़र के वंशज, जिसे किताबों में ‘गद्दार’ कहा गया, लेकिन जिनकी आने वाली पीढ़ियां आज अपनी पहचान बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं।

“हम हिंदुस्तानी नहीं?” वोटर लिस्ट से नाम गायब, टूटा भरोसा
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में रहने वाले मीर जाफ़र के परिवार के 300 से ज्यादा लोगों के नाम इस बार की मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह सब हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद। आमिर मिर्ज़ा इस फैसले को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका बताते हैं। उनके हाथ में वो कागज़ हैं जो बताते हैं कि उन्हें केंद्र सरकार से हर महीने रॉयल पेंशन मिलती है फिर भी उन्हें “भारतीय” मानने से इंकार किया जा रहा है। “हमसे कहा गया कि हम हिंदुस्तान के नागरिक नहीं इससे बड़ा दुख क्या होगा?”

वोट देना सम्मान था अब पहचान ही छिन गई
आमिर मिर्ज़ा के बेटे बताते हैं कि उनके पिता हर चुनाव में सबसे पहले वोट डालने वालों में होते थे। उनके लिए वोट देना सिर्फ अधिकार नहीं, सम्मान था। लेकिन अब वोटर लिस्ट से नाम कटना, उनके आत्मसम्मान पर सीधा वार बन गया है।

‘छोटे नवाब’ भी नहीं सो पाए दो रात
परिवार के ही एक और सदस्य सैय्यद रेज़ा अली मिर्ज़ा, जिन्हें इलाके में ‘छोटे नवाब’ कहा जाता है, इस फैसले से इतने टूट गए कि दो रात तक सो नहीं पाए। “82 साल का हो गया कभी ऐसा नहीं हुआ। हमने क्या अपराध किया?” उनका सवाल सीधा है “हमारे बाप-दादा ने यहां हुकूमत की फिर हमारा नाम क्यों हटाया?”

इतिहास की उलझन: गद्दारी का दाग, लेकिन योगदान भी
1757 की प्लासी की लड़ाई में मीर जाफ़र का नाम भले विवादित रहा हो लेकिन इतिहासकार बताते हैं कि उनकी आने वाली पीढ़ियों ने बंगाल में बड़ा योगदान दिया। मुर्शिदाबाद के इतिहासकार प्रो. फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के मुताबिक 1947 में जब बंटवारा हुआ, मुर्शिदाबाद पहले पाकिस्तान में गया 18 अगस्त को वापस भारत में शामिल हुआ। इसमें नवाब वासिफ़ अली मिर्ज़ा की अहम भूमिका थी। नवाब परिवार के पास पाकिस्तान या इंग्लैंड जाने का विकल्प था लेकिन उन्होंने भारत चुना।

“यहां मंदिर-मस्जिद साथ हैं” सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
इतिहासकार बताते हैं कि मुर्शिदाबाद में नवाब परिवार ने संगीत, साहित्य, कला में योगदान दिया। हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत किया आज भी यहां मस्जिद के बगल में मंदिर है, दुर्गा पूजा में मुस्लिम भागीदारी, मुहर्रम में हिंदुओं की मौजूदगी देखी जा सकती है यह साझा संस्कृति आज भी जिंदा है।

राजनीति भी गरम: BJP vs TMC आमने-सामने
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। BJP विधायक गौरी शंकर घोष ने TMC पर आरोप लगाया कि जानबूझकर नाम हटवाए गए। वहीं TMC नेता मोहम्मद अली ने कहा लोगों को गुमराह किया जा रहा है, यह प्रक्रिया स्थायी हटाने के लिए नहीं है।

प्रशासन का दावा: अपील का रास्ता खुला है
मुर्शिदाबाद के डीएम आर अर्जुन ने कहा जिनके नाम कटे हैं, वे ट्राइब्यूनल में अपील कर सकते हैं प्रशासन उनकी मदद कर रहा है, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके उपलब्ध हैं।

63 लाख नाम हटे, 49 लाख अभी भी लंबित
SIR प्रक्रिया के बाद 63 लाख से ज्यादा नाम हट चुके हैं, 49 लाख मामले अभी विचाराधीन हैं। आशंका है कि कई लोग इस चुनाव में वोट देने से वंचित रह सकते हैं।

“मरने के बाद दो गज़ ज़मीन…” एक आखिरी ख्वाहिश
सैय्यद रेज़ा अली मिर्ज़ा की आंखें नम हो जाती हैं जब वो अपनी आखिरी इच्छा बताते हैं उन्होंने अपनी आखरी इक्षा बताते हुए कहा की “जब मरूं… तो जाफ़रागंज में अपने बाप-दादा के पास दफन हो सकूं, बस दो गज़ ज़मीन मिल जाए… बहादुर शाह ज़फ़र की तरह भटकना न पड़े…”

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