The Red Ink
राजधानी लखनऊ का हजरतगंज गुरुवार दोपहर अचानक सियासी रणभूमि में बदल गया, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। मेयर सुषमा खर्कवाल के खिलाफ नाराजगी और गाजीपुर की घटना को लेकर गुस्साए कार्यकर्ताओं ने चौराहे पर जमकर नारेबाजी की और सरकार को सीधे निशाने पर लिया।
गाजीपुर कांड बना विरोध की वजह
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक युवती की हत्या ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सपा नेता राज साहनी ने आरोप लगाया “प्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार पीड़ितों को न्याय देने में नाकाम है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने गया, तो पुलिस ने उसे रोकते हुए “बर्बरता की हदें पार” कर दीं।
पुलिस पर दमन का आरोप
प्रदर्शन में शामिल आनंद यादव ने सरकार पर पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाया। “हम न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार ने प्रशासन के जरिए हमें पीड़ित परिवार तक पहुंचने से रोका। यह लोकतंत्र के खिलाफ है।” उन्होंने साफ चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सपा हर हाल में न्याय की लड़ाई जारी रखेगी।
मेयर पर भी सीधा हमला
प्रदर्शन के दौरान लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल भी सपा के निशाने पर रहीं। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मेयर द्वारा पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के प्रति किया गया व्यवहार “अपमानजनक” है और इसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
गाजीपुर की घटना और लखनऊ की सियासत अब एक ही फ्रेम में आ गई है। एक तरफ कानून-व्यवस्था पर सवाल दूसरी तरफ सियासी टकराव तेज, आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ सड़कों तक सीमित रहेगा या बड़े राजनीतिक टकराव में बदलेगा इस पर सबकी नजर है।




