The Red Ink
राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए पुलिस ने गोमतीनगर स्थित समिट बिल्डिंग में चल रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। देर रात शुरू हुए इस ऑपरेशन में 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार कई देशों तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।
आधी रात चला हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन
क्राइम ब्रांच और साइबर टीम ने गुप्त सूचना मिलने के बाद मंगलवार देर रात समिट बिल्डिंग में संयुक्त छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पूरी इमारत को सुरक्षा घेरे में लेकर कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया गया। ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद कर्मचारियों और संदिग्धों से पूछताछ की गई। हिरासत में लिए गए लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
विदेशी नागरिकों को बनाया जाता था निशाना
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को तकनीकी सहायता, बैंकिंग सेवाओं और ऑनलाइन सपोर्ट के नाम पर संपर्क किया जाता था। इसके बाद उन्हें झांसे में लेकर साइबर ठगी की वारदात को अंजाम दिया जाता था। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहा था और इसके तार विदेशों में बैठे संचालकों से जुड़े हो सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बड़ा जखीरा बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, सर्वर, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इन सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि साइबर ठगी का नेटवर्क किस तरह संचालित किया जा रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की होगी जांच
जांच एजेंसियां अब गिरोह से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और संभावित हवाला कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं। इसके साथ ही विदेशी संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव की अगुवाई में हुई कार्रवाई
पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने किया। इस अभियान में क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और कई थानों की पुलिस टीमों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में लखनऊ में साइबर अपराध के खिलाफ यह सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है।
कई बड़े खुलासों की उम्मीद
फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी लोगों से पूछताछ जारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली, फंडिंग और विदेशी कनेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। जल्द ही पुलिस की ओर से विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे ऑपरेशन की जानकारी साझा किए जाने की संभावना है।




