ईरान में इंटरनेट पाबंदी का बड़ा असर: लाखों नौकरियां खतरे में, डिजिटल अर्थव्यवस्था को भारी झटका

The Red Ink: जंग के बीच 50 दिनों से ज्यादा इंटरनेट बाधित; 10 लाख से अधिक रोजगार खत्म होने का अनुमान, सरकार के भीतर भी मतभेद…

इंटरनेट ठप, रोज़गार पर सीधा वार
Iran में जारी इंटरनेट पाबंदियों ने देश की अर्थव्यवस्था और रोज़गार पर गहरा असर डाला है। शुरुआती आकलनों के मुताबिक, इंटरनेट बाधित रहने से अब तक 10 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म हो चुकी हैं, जबकि लाखों लोग बेरोज़गारी के खतरे से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में करीब एक करोड़ लोग अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर स्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर हैं।

डिजिटल सेक्टर को अरबों का नुकसान
इंटरनेट प्रतिबंधों का सबसे बड़ा असर डिजिटल अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्षेत्र को अब तक लगभग 2,150 ट्रिलियन रियाल (करीब 1.69 अरब डॉलर) का नुकसान हो चुका है। रोजाना के स्तर पर डिजिटल सेक्टर को करीब 5 ट्रिलियन रियाल और पूरी अर्थव्यवस्था को लगभग 50 ट्रिलियन रियाल का नुकसान बताया जा रहा है। घरेलू डिजिटल प्लेटफॉर्म भी अचानक बढ़ी मांग को संभालने में नाकाम रहे, जिससे सिस्टम पर दबाव और बढ़ गया।

54 दिन से जारी रुकावट, बढ़ती चिंता
देशभर में इंटरनेट की रुकावट अब 50 दिनों से अधिक समय से जारी है। लगातार बाधित कनेक्टिविटी के कारण व्यापार, फ्रीलांसिंग, ऑनलाइन सेवाएं और छोटे कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सरकारी हलकों में भी इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती दिख रही है।

सरकार के भीतर भी मतभेद उभरे
ईरान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इंटरनेट पाबंदी को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। Mohammad Reza Aref ने इंटरनेट को “सार्वभौमिक अधिकार” बताते हुए समान और बिना भेदभाव के एक्सेस की वकालत की है। उन्होंने चेतावनी दी कि बहु-स्तरीय या सीमित इंटरनेट व्यवस्था सामाजिक असंतुलन को बढ़ा सकती है।

रोज़गार संकट के आंकड़े और गहराए
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उप श्रम मंत्री गुलाम हुसैन मोहम्मदी ने संकेत दिया है कि 10 लाख से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं, जबकि करीब 20 लाख लोग सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। कुछ स्वतंत्र आकलनों में यह आंकड़ा और ज्यादा बताया जा रहा है—जहां 40 लाख तक नौकरियों के खत्म होने या प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

जंग का हवाला, लेकिन बढ़ रहे सवाल
अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और इसराइल के साथ चल रहे तनाव के कारण यह पाबंदी “विशेष परिस्थितियों” में लगाई गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, हालात सामान्य होने के बाद ही इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बहाल की जाएंगी। हालांकि, इस तर्क पर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या सुरक्षा के नाम पर लंबे समय तक डिजिटल गतिविधियों को ठप रखना सही है।

कम आय वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
Sattar Hashemi ने माना कि इंटरनेट की अस्थिरता का सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, लाखों लोग अपनी रोज़ी-रोटी के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं और लगातार बाधाएं उनके लिए सीधा खतरा बन चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि टेलीकॉम सेक्टर पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और कुछ कंपनियों को कर्मचारियों की सैलरी देने में भी दिक्कत आ रही है।

आगे क्या? राहत या और संकट
ईरान में इंटरनेट पाबंदी ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आज सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि रोजगार और अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। अब सवाल यही है कि क्या सरकार जल्द संतुलन बनाकर इंटरनेट बहाल करेगी या यह संकट और गहराएगा।

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