“निडर हूं, लेकिन शालीनता ही मेरी पहचान”- संसद से सियासत तक Iqra Hasan की साफ बात

The Red Ink Special-
उत्तर प्रदेश की सियासत में उभरती नई आवाजों में से एक नाम है Iqra Hasan का। सादगी, स्पष्टता और बिना आक्रामक हुए अपनी बात रखने के अंदाज ने उन्हें अलग पहचान दी है। The Red Ink के खास बातचीत में उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, आत्मविश्वास और संसद में अपनी भूमिका को लेकर खुलकर बात की।

“बचपन से संसद देखी, लेकिन खुद पर भरोसा नहीं था”
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी सोचा था कि वह सांसद बनेंगी, तो Iqra Hasan ने साफ कहा कि राजनीति उनके लिए नई नहीं थी लेकिन खुद को उस भूमिका में देखना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि वह बचपन से अपनी मां के साथ संसद जाती थीं, लेकिन उस समय उनमें यह आत्मविश्वास नहीं था कि वह खुद भी राजनीति में आएंगी। उनके शब्दों में, “परिस्थितियां जैसे-जैसे बदलती हैं, इंसान का सोचने का तरीका भी वैसा ही बनता चला जाता है।”

“हर नेता का अपना अंदाज़ होता है, मेरा तरीका अलग है”
संसद में मुखर होकर सवाल पूछने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राजनीति में हर नेता का अपना स्टाइल होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आक्रामक या टकराव वाले अंदाज में विश्वास नहीं रखतीं, बल्कि सादगी और साफगोई से अपनी बात रखना पसंद करती हैं। “ऐसा नहीं है कि अगर कोई बात शांत लहजे में कही जाए तो वह कमजोर होती है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं निडर होकर, लेकिन सरल तरीके से अपनी बात रखूं।” उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति सिर्फ शोबाजी का मंच नहीं है। इस संदर्भ में उन्होंने Akhilesh Yadav का जिक्र करते हुए कहा कि उनका भी अंदाज हमेशा संतुलित और सार्थक रहता है।

“शालीनता ही मेरी ताकत है”
जब उनसे उनके शांत और सरल व्यक्तित्व पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि लोगों का प्यार और सराहना उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती है। “राजनीति में हर कोई आपके साथ नहीं होता, आलोचना भी होती है। लेकिन जब कुछ लोग आपकी सराहना करते हैं, तो वही हिम्मत बन जाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि आलोचना के बीच जो समर्थन मिलता है, वही उन्हें और मजबूती देता है।

“संसद में खड़ी होती हूं तो डर नहीं, जिम्मेदारी महसूस होती है”
संसद में सवाल पूछते समय झिझक को लेकर Iqra Hasan ने साफ कहा कि उन्हें कभी डर महसूस नहीं होता।
“आत्मविश्वास उस जनता से आता है जिसने हमें वहां भेजा है। मैं अपने लिए नहीं, लोगों के लिए बोलती हूं। अगर मैं उनकी आवाज नहीं बन पाई, तो वहां बैठने का कोई मतलब नहीं है।” उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना लोकतंत्र की सबसे जरूरी प्रक्रिया है। इस दौरान उन्होंने Amit Shah और प्रधानमंत्री Narendra Modi जैसे बड़े नेताओं के सामने भी बिना झिझक अपनी बात रखने की बात कही।

“बदलाव की शुरुआत हो चुकी है”
बातचीत के अंत में उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लोग कई समस्याओं से जूझ रहे हैं और अब बदलाव की उम्मीद दिखाई दे रही है। “आगाज़ हो चुका है और हमें विश्वास है कि बदलाव आएगा।”

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