बिन फेरे हम तेरे, “जनगणना” में बदल रहे हैं रिश्तों के मायने…!

Census 2027: देश में होने जा रही अगली जनगणना में एक बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिल सकता है, Census 2027 के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को ‘शादीशुदा’ की श्रेणी में रखा जा सकता है लेकिन एक शर्त के साथ अगर कोई कपल अपने रिश्ते को “स्थायी” या लंबे समय तक चलने वाला मानता है, तो वह खुद को विवाहित के रूप में दर्ज कर सकता है। यह व्यवस्था खासतौर पर इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि पहली बार इस तरह के रिश्तों को औपचारिक पहचान देने की दिशा में स्पष्ट संकेत मिला है।

पहली बार सरकार की ओर से स्पष्ट रुख
Ministry of Home Affairs के तहत आने वाले जनगणना विभाग ने इस मुद्दे पर स्थिति साफ की है। अधिकारियों के अनुसार अगर दोनों पार्टनर अपने संबंध को “Stable Union” यानी स्थायी रिश्ता मानते हैं, तो उन्हें विवाहित श्रेणी में गिना जाएगा। हालांकि, यह भी सामने आया है कि पहले भी कुछ मामलों में अगर लिव-इन कपल खुद को विवाहित बताते थे, तो उन्हें उसी आधार पर दर्ज किया जाता था लेकिन इस बार इसे अधिक स्पष्ट और संरचित तरीके से लागू किया जा रहा है।

डिजिटल जनगणना और Self Enumeration की सुविधा
इस बार की जनगणना कई मायनों में अलग होगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा जुटाएंगे एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर ऐप काम करेगा सबसे अहम बदलाव यह है कि लोगों को Self Enumeration Portal के जरिए खुद अपनी जानकारी भरने का विकल्प मिलेगा। घरों की लिस्टिंग शुरू होने से पहले 15 दिनों तक लोग खुद से अपनी डिटेल दर्ज कर सकेंगे।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया
जनगणना की प्रक्रिया दो फेज में आयोजित की जाएगी पहला चरण (1 अप्रैल – 30 सितंबर 2026) हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस, घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी। दूसरा चरण (फरवरी 2027 तक) आबादी से जुड़ी विस्तृत जानकारी, यह जनगणना मूल रूप से 2021 में होनी थी लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।

जाति गणना भी होगी शामिल
इस बार की जनगणना का एक और बड़ा पहलू जाति आधारित डेटा संग्रह है। आजादी के बाद पहली बार इसे आधिकारिक तौर पर शामिल किया जा रहा है। इससे पहले आखिरी बार 1931 में जाति आधारित जनगणना हुई थी। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यम से डेटा जुटाने से पारदर्शिता और सटीकता दोनों में सुधार होगा।

सामाजिक बदलाव की ओर इशारा
लिव-इन रिलेशनशिप को “शादीशुदा” श्रेणी में शामिल करने का विकल्प भारतीय समाज में बदलते रिश्तों की स्वीकार्यता को भी दर्शाता है। यह कदम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि सामाजिक संरचना में हो रहे बदलावों को दर्ज करने की कोशिश भी माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कितने लोग इस विकल्प का उपयोग करते हैं और यह बदलाव आने वाले समय में सामाजिक व कानूनी बहस को किस दिशा में ले जाता है।

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