The Red Ink
अमित शाह सोनिया गांधी को लेकर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाए जाने से रोकने की कोशिश की गई। इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की जनता ऐसे कृत्य को कभी माफ नहीं करेगी।
चित्तौड़गढ़ के कार्यक्रम में बोले अमित शाह
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ का गान चल रहा था, तभी सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष से इसे रुकवाने के लिए कहा।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में वंदे मातरम का गान हो रहा था। राष्ट्रगीत के दौरान कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष से इसे रोकने के लिए कहा। यह पूरा मामला देश ने टीवी पर देखा है और 140 करोड़ लोग आपको देख रहे हैं।”
‘वंदे मातरम को सम्मान मिल रहा, कांग्रेस को रास नहीं’
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के अमर गीत ‘वंदे मातरम’ को आजादी के करीब 80 साल बाद फिर से वह सम्मान मिल रहा है, जिसका वह हकदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को यह भी स्वीकार नहीं हो रहा है।
शाह ने कहा, “80 साल बाद बंकिम बाबू के इस अमर गीत को फिर से सम्मान मिल रहा है, लेकिन सोनिया जी को यह भी रास नहीं आ रहा है। आपने जो पाप किया है, उसे देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई वंदे मातरम जैसे राष्ट्रगीत को अधूरा छोड़ने के बारे में सपने में भी कैसे सोच सकता है?”
क्या है पूरा विवाद?
बीजेपी का आरोप है कि दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गान को लेकर असहज स्थिति पैदा हुई। इसी को लेकर पार्टी कांग्रेस पर लगातार हमलावर है।
हालांकि, कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ पूरा बजाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गान के दौरान एक अंतराल आने के बाद कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता असहज नजर आए थे। इसी घटनाक्रम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी
‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर कांग्रेस को घेर रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर अलग रुख सामने आ सकता है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।




