The Red Ink: महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की तैयारी के बीच Akhilesh Yadav ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने साफ कहा है कि जनगणना के बिना महिला आरक्षण का आधार ही कमजोर है क्योंकि पुराने आंकड़ों पर फैसले लेना गलत दिशा में कदम होगा।
क्या है पूरा विवाद?
संसद के बजट सत्र को तीन दिन बढ़ाया गया है, ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण देने के लिए 2023 में बने कानून को 2029 से लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। इस बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने केरल की रैली में कहा कि 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद में इस पर कानूनी मुहर लगाई जाएगी, साथ ही दक्षिण के राज्यों केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा और तेलंगाना की लोकसभा सीटों में कोई कमी नहीं की जाएगी।
अखिलेश यादव की आपत्ति क्या है?
अखिलेश यादव ने इस पूरे मुद्दे पर सीधे सरकार को घेरा। उनका कहना है “जब गिनती ही गलत होगी, तो आरक्षण कैसे सही होगा?” उन्होंने कहा कि सरकार 2011 की पुरानी जनगणना के आंकड़ों पर महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, जो पूरी तरह गलत आधार है।
“पहले जनगणना, फिर आरक्षण”
सपा प्रमुख ने दो टूक कहा पहले नई जनगणना कराई जाए उसके बाद ही महिला आरक्षण लागू किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि “जो सरकार महिलाओं को गिनना नहीं चाहती, वो उन्हें आरक्षण क्या देगी?”
गणित और राजनीति का तर्क
अखिलेश यादव ने इसे सीधा गणित का मामला बताया। उनका कहना है कि जब आरक्षण कुल सीटों के एक-तिहाई (1/3) पर आधारित है, तो इसका आधार सही जनसंख्या आंकड़े होने चाहिए। उन्होंने कहा “जब आधार ही गलत होगा, तो नतीजा भी सही नहीं होगा, दोषपूर्ण जमीन पर सही फसल नहीं उग सकती।”
सरकार पर ‘छलावा’ का आरोप
अखिलेश यादव ने भाजपा पर महिलाओं के साथ “धोखा” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनगणना के बिना महिला आरक्षण पर बहस ही गलत है।
महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। एक तरफ केंद्र सरकार इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष जनगणना को इसकी पहली शर्त बता रहा है। अब देखना होगा कि संसद में इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है।




