The Red Ink
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख Mayawati ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। संसद के 3 दिन के विशेष सत्र से पहले उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं, क्योंकि “बातें ज्यादा हो रही हैं, लेकिन जमीन पर अमल कम दिखता है।”
‘नीयत और इच्छाशक्ति के बिना बेअसर योजनाएं’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने कहा कि किसी भी बड़े फैसले की सफलता उसके इरादे और उसे लागू करने की क्षमता पर निर्भर करती है। उनके मुताबिक, महिला सशक्तिकरण जैसे गंभीर मुद्दे पर सरकार की नीयत और मजबूत इच्छाशक्ति का अभाव साफ नजर आता है।
33% आरक्षण का स्वागत, लेकिन भरोसा नहीं
उन्होंने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का स्वागत जरूर किया, लेकिन इसके वास्तविक असर पर गंभीर संदेह जताया। उनका कहना था कि अगर मौजूदा ढांचे में ही इसे लागू किया गया, तो वंचित तबकों की महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचना मुश्किल होगा।
‘50% आरक्षण ही असली न्याय’
Mayawati ने एक बार फिर अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि महिलाओं को उनकी आबादी के हिसाब से 50% आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के चलते इस मांग को नजरअंदाज करते हैं।
SC-ST और OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा जरूरी
मायावती ने सबसे अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के भीतर SC-ST और OBC वर्ग की महिलाओं के लिए अलग कोटा अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह आरक्षण केवल सीमित वर्ग तक सिमट कर रह जाएगा और सामाजिक न्याय का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
मंडल आयोग जैसी व्यवस्था की वकालत
उन्होंने कहा कि जैसे OBC वर्ग को 27% आरक्षण देने के लिए मंडल आयोग जैसी व्यवस्था लागू की गई थी, उसी तरह महिला आरक्षण में भी ठोस और संतुलित ढांचा बनाना होगा, ताकि हर वर्ग की महिलाओं को समान अवसर मिल सके।
‘असली हकदारों तक पहुंचे लाभ’
मायावती ने जोर देकर कहा कि समाज के शोषित और पिछड़े वर्ग की महिलाएं ही इस आरक्षण की वास्तविक हकदार हैं। अगर अलग प्रावधान नहीं किया गया, तो इन वर्गों की महिलाएं फिर से हाशिए पर चली जाएंगी।
राजनीति से ऊपर उठने की अपील
अपने बयान के अंत में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर महिला सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को प्राथमिकता दें। उनका कहना था कि सही नीति और ईमानदार क्रियान्वयन के बिना महिला आरक्षण का मकसद कभी पूरा नहीं हो पाएगा।




