नोएडा में मजदूरों का विस्फोट: कम तनख्वाह, महंगाई और शोषण के खिलाफ सड़कों पर उतरा गुस्सा, कई जगह हिंसा

The Red Ink: फेज-2 बना टकराव का केंद्र आगजनी, लाठीचार्ज और प्रशासनिक हलचल के बीच 24 घंटे में समाधान का आदेश…

फेज-2 में भड़का आंदोलन, हालात बेकाबू
नोएडा के औद्योगिक इलाकों में सोमवार को मजदूरों का गुस्सा अचानक उफान पर आ गया। न्यूनतम वेतन, काम के घंटे और बुनियादी सुविधाओं को लेकर हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए। शुरुआत शांतिपूर्ण विरोध से हुई, लेकिन देखते ही देखते कई जगहों पर हालात बिगड़ गए और प्रदर्शन हिंसक हो गया। सबसे ज्यादा तनाव फेज-2 इलाके में देखने को मिला, जहां प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में तोड़फोड़ की और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कंपनियों के बाहर अफरा-तफरी मच गई और हालात संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

कम वेतन और ज्यादा काम बना गुस्से की वजह
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि उनकी समस्याएं लंबे समय से अनदेखी की जा रही हैं। उनका आरोप है कि उनसे रोजाना 10 से 12 घंटे तक काम लिया जाता है, लेकिन इसके बदले बहुत कम वेतन दिया जाता है। कई मजदूरों ने बताया कि उनकी मासिक आय 15 हजार रुपये से भी कम है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। एलपीजी, किराया और बच्चों की फीस जैसे खर्चों ने हालात और मुश्किल कर दिए हैं।

महिला मजदूरों ने भी खोला मोर्चा
प्रदर्शन में शामिल महिला मजदूरों ने भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें समय पर भोजन तक नहीं मिलता और कार्यस्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ओवरटाइम का भुगतान सही तरीके से नहीं किया जाता और छुट्टी व बोनस जैसी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं, जिससे उनका जीवनयापन और कठिन हो गया है।

क्या हैं मजदूरों की प्रमुख मांगें?
मजदूरों ने अपनी मांगों को साफ तौर पर रखा है। वे चाहते हैं कि न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए, ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से मिले और काम के घंटे तय किए जाएं। इसके अलावा हर हफ्ते एक दिन की छुट्टी, समय पर वेतन भुगतान और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।

प्रशासन ने संभाली कमान, बातचीत जारी
हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया। डिप्टी लेबर कमिश्नर, एडिशनल डीसीपी समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और मजदूरों से बातचीत शुरू की। प्रशासन की कोशिश है कि संवाद के जरिए स्थिति को जल्द सामान्य किया जाए लेकिन फिलहाल मजदूर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

सरकार सख्त, 24 घंटे में समाधान के निर्देश
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर मजदूर यूनियनों से बातचीत कर समाधान निकालने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि हर मजदूर को सम्मानजनक वेतन, सुरक्षित माहौल और मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि मजदूरों के नाम पर माहौल बिगाड़ने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में महंगाई और बेरोजगारी बढ़ने से मजदूरों की हालत खराब हो गई है और नोएडा की स्थिति के लिए सरकार जिम्मेदार है।

पुलिस अलर्ट, FIR की तैयारी
यूपी पुलिस ने कहा है कि हालात को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया और किसी तरह की फायरिंग नहीं हुई। पुलिस ने यह भी बताया कि अफवाह फैलाने वाले दो सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है। डीजीपी Rajiv Krishna ने कहा कि बाहरी तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नाजुक हालात, आगे क्या?
फिलहाल नोएडा में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, जबकि मजदूर अपनी मांगों पर डटे हैं। आने वाले 24 घंटे इस पूरे आंदोलन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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