The Red Ink: मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो हफ्ते का सीजफायर 12 घंटे भी टिकता नजर नहीं आया। ताजा घटनाक्रम में दोनों तरफ से हमलों की खबरों ने पूरे क्षेत्र को फिर युद्ध की दहलीज पर ला खड़ा किया है।
सीजफायर के तुरंत बाद भड़की आग
भारतीय समयानुसार आज सुबह करीब साढ़े 4 बजे अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे क्षेत्र में तनाव कम होगा लेकिन कुछ ही घंटों में हालात पलट गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की एक अहम तेल रिफाइनरी में बड़ा धमाका हुआ। बताया जा रहा है कि यह रिफाइनरी फारस की खाड़ी में स्थित लावन द्वीप पर है, जो ईरान के प्रमुख कच्चा तेल निर्यात टर्मिनलों में से एक माना जाता है और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
हमले के बाद ईरान का जवाबी वार
रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद ईरान ने भी तुरंत पलटवार शुरू कर दिया। IRIB की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कुवैत और यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस कार्रवाई के साथ ही ईरान ने सीजफायर को अपनी कूटनीतिक जीत करार दिया और दावा किया कि अमेरिका को उसके प्रस्तावों पर झुकना पड़ा है।
ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव चर्चा में
ईरान की ओर से पेश किए गए 10-सूत्रीय प्रस्ताव को इस पूरे विवाद के केंद्र में माना जा रहा है। इस प्रस्ताव में स्थायी युद्धविराम, सभी तरह के प्रतिबंध हटाने, यूरेनियम संवर्धन को स्वीकार करने और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी जैसी अहम शर्तें शामिल हैं।
इसके अलावा प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता देने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य संस्थाओं के प्रस्ताव खत्म करने, ईरान को हर्जाना देने और लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की बात भी कही गई है।
फिर बढ़ता टकराव, अनिश्चित भविष्य
जिस सीजफायर को मिडिल ईस्ट में शांति की शुरुआत माना जा रहा था, वही अब नए टकराव की वजह बनता दिख रहा है। रिफाइनरी पर हमला और उसके बाद मिसाइल की जवाबी कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि हालात अभी भी बेहद नाजुक हैं और किसी भी वक्त बड़ा सैन्य टकराव फिर भड़क सकता है।




