The Red Ink: पाकिस्तान की आर्थिक हालत पर एक और बड़ा दबाव आ गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने दिए गए अरबों डॉलर के कर्ज की वापसी की मांग कर दी है, जिसके बाद पाकिस्तान को करीब 32,500 करोड़ रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
30 साल पुराना कर्ज भी लौटाना पड़ेगा
पाकिस्तान को कुल 3.5 बिलियन डॉलर (करीब 32,500 करोड़ रुपये) का कर्ज चुकाना है। इसमें 450 मिलियन डॉलर (लगभग 4,184 करोड़ रुपये) का वह लोन भी शामिल है, जो 1996-97 में लिया गया था। यानी पाकिस्तान अब करीब 30 साल पुराने कर्ज को भी वापस करने जा रहा है।
किस्तों में लौटाया जाएगा पैसा
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने कर्ज चुकाने का पूरा शेड्यूल तय कर लिया है। 11 अप्रैल को 450 मिलियन डॉलर, 17 अप्रैल को 2 बिलियन डॉलर, 23 अप्रैल को 1 बिलियन डॉलर। सरकार का कहना है कि इन भुगतानों की व्यवस्था की जा रही है।
रोलओवर से पीछे हटा UAE
रिपोर्ट के अनुसार, UAE पहले ही इस कर्ज को आगे बढ़ाने (रोलओवर) को लेकर हिचकिचा रहा था। इस बीच अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और जंग की स्थिति के बाद UAE ने पाकिस्तान से पूरा पैसा वापस मांग लिया। हालांकि कुछ अधिकारियों का कहना है कि इस रकम को निवेश में बदलने पर भी चर्चा चल रही है।
ब्याज दर को लेकर भी नहीं बनी बात
UAE ने जनवरी में मैच्योर हो रहे 1 बिलियन डॉलर के दो लोन को केवल एक महीने के लिए बढ़ाया था। पाकिस्तान ने इन्हें दो साल के लिए बढ़ाने और करीब 3% ब्याज दर की मांग की थी लेकिन UAE ने इसे 6.5% की पुरानी ब्याज दर पर ही आगे बढ़ाया।
पाकिस्तान के फॉरेन रिजर्व पर दबाव
एक पाकिस्तानी कैबिनेट मंत्री के मुताबिक, फिलहाल देश का विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर बना हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पाकिस्तान ऐसे दौर से गुजर चुका है, जब उसके पास सिर्फ एक हफ्ते के आयात के बराबर ही रिजर्व बचा था। 2026 की शुरुआत में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उद्योगपतियों से बातचीत में कहा था कि रिजर्व में सुधार हुआ है लेकिन यह मुख्य रूप से मित्र देशों से मिले 12 अरब डॉलर की मदद के कारण संभव हुआ।
शहबाज शरीफ का बयान
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले कहा था कि जब वे वित्तीय मदद के लिए दुनिया भर में गए, तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने कहा, “जब हम कर्ज लेते हैं तो हमारे आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचती है।” साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कर्ज देने वाले देश बदले में कुछ शर्तें रखते हैं, जिन्हें कई बार मानना पड़ता है।
UAE द्वारा कर्ज की वापसी की मांग ने पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को और गहरा कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान इस भारी भुगतान को कैसे मैनेज करता है और इसका उसकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।




