अमेरिका में बड़ा सैन्य फेरबदल: ट्रंप प्रशासन ने आर्मी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ को पद से हटाया

The Red Ink: अमेरिका में सैन्य नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने आर्मी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जनरल रैंडी जॉर्ज से पद छोड़ने को कहा है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में बताया कि रैंडी जॉर्ज “अमेरिकी सेना के 41वें चीफ़ ऑफ स्टाफ के पद से तत्काल प्रभाव से रिटायर हो रहे हैं।”

चार साल का होता है कार्यकाल, बीच में ही हटे
आर्मी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ का कार्यकाल आमतौर पर चार साल का होता है लेकिन जॉर्ज को तय समय से पहले ही पद छोड़ना पड़ा है। रैंडी जॉर्ज ने वेस्ट पॉइंट मिलिट्री एकेडमी से पढ़ाई की है और उन्हें 2023 में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस पद के लिए नियुक्त किया था।

ईरान युद्ध के बीच हुआ फैसला
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने संबोधन में कहा था कि अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ जारी संघर्ष “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है। जॉर्ज का सैन्य अनुभव भी लंबा रहा है। उन्होंने खाड़ी युद्ध के साथ-साथ इराक और अफ़ग़ानिस्तान के संघर्षों में एक इन्फैंट्री अधिकारी के रूप में सेवा दी है।

कारण पर अब भी सस्पेंस
हालांकि, उनसे इस्तीफ़ा क्यों मांगा गया, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। सीबीएस से बातचीत में रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हम उनकी सेवाओं के लिए आभारी हैं लेकिन अब सेना में नेतृत्व परिवर्तन का समय आ गया था।”

नए कार्यवाहक चीफ़ की नियुक्ति
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, आर्मी वाइस चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जनरल क्रिस्टोफ़र ला-नेव को कार्यवाहक आर्मी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ की जिम्मेदारी दी जाएगी। पेंटागन प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि ला-नेव एक अनुभवी सैन्य नेता हैं और उन्हें दशकों का ऑपरेशनल अनुभव हासिल है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा मंत्री हेगसेथ को उन पर पूरा भरोसा है कि वे सरकार के विज़न को आगे बढ़ाएंगे।

पहले भी हो चुके हैं कई बड़े बदलाव
पेंटागन में आने के बाद से रक्षा मंत्री हेगसेथ कई बड़े फैसले ले चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, वे अब तक एक दर्जन से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटा चुके हैं। इनमें चीफ़ ऑफ़ नेवल ऑपरेशंस और एयर फ़ोर्स के वाइस चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जैसे अहम पद भी शामिल हैं।

जब युद्ध का माहौल हो और उसी समय सेना के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव हो तो यह सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि बड़ी रणनीतिक हलचल का संकेत भी हो सकता है।

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