Lucknow News: हिंदू-मुस्लिम एकता सम्मेलन में बोले मौलाना अरशद मदनी- ‘कुरान मोहब्बत सिखाता है, नफरत नहीं’

The Red Ink
लखनऊ में आयोजित हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद कॉन्फ्रेंस में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कुरान इंसानियत, मोहब्बत और शांति की शिक्षा देता है, इसलिए लोगों को इसके संदेश को समझने की जरूरत है। सम्मेलन में विभिन्न धर्मों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता पर अपने विचार रखे।

‘कुरान नफरत नहीं, इंसानियत का संदेश देता है’
अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि लोगों को कुरान पढ़ने और उसके वास्तविक संदेश को समझने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुरान कहीं भी नफरत या हिंसा का समर्थन नहीं करता, बल्कि इंसानों के बीच प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। उनके अनुसार, इसी कारण दुनिया के कई हिस्सों में इस्लाम के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है।

हिंदू-मुस्लिम एकता पर रहा सम्मेलन का फोकस
जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों से सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, धार्मिक प्रतिनिधि और विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, संवाद और आपसी विश्वास को मजबूत करने पर चर्चा करना रहा।

इंदिरा जयसिंह ने साझा किया अपना अनुभव
सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि बचपन में उन्होंने अजान सीखी थी, लेकिन व्यस्त पेशेवर जीवन के दौरान उसे भूल गईं। उन्होंने कहा कि अब वह दोबारा उसे सीखना चाहेंगी।

‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से सावधान रहने की अपील
लखनऊ आलमबाग गुरुद्वारा के प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अफवाहें और भड़काऊ संदेश समाज में तनाव पैदा करते हैं। लोगों को ऐसी सामग्री पर आंख बंद कर विश्वास करने के बजाय सत्यापित जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।

बौद्ध और क्रिश्चियन प्रतिनिधियों ने भी रखी बात
सम्मेलन में बौद्ध भिक्षु गुरु शांति रजत ने संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा और समान अधिकार समाज को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी ताकत हैं। वहीं, क्रिश्चियन समुदाय की ओर से जितेंद्र सिंह ने धार्मिक सौहार्द और सभी समुदायों के बीच सम्मानजनक माहौल बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

शिक्षा और विकास पर दिया गया जोर
जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े फजलुर्रहमान कासमी ने कहा कि समाज में स्थायी बदलाव शिक्षा और रोजगार के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि विकास और सामाजिक उत्थान को प्राथमिकता देते हुए समाज के हर वर्ग तक शिक्षा और अवसर पहुंचाने की जरूरत है।

सम्मेलन का मुख्य संदेश
कार्यक्रम में शामिल विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि देश में आपसी संवाद, भाईचारा और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना समय की जरूरत है। वक्ताओं ने नफरत से दूर रहकर सामाजिक सौहार्द और एकजुटता को बढ़ावा देने की अपील की।

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