The Red Ink
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सफदरजंग अस्पताल ने वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी भी साझा की है।
अखिलेश यादव ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए वांगचुक को अनशन स्थल से हटाने की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि इस कार्रवाई में सादे कपड़ों में मौजूद लोगों को लगाया गया था, तो उनकी पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए। अखिलेश ने मांग की कि सोनम वांगचुक का इलाज न्यायिक निगरानी में कराया जाए, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वांगचुक पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान, नवाचार और युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
पवन खेड़ा बोले— शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि शांतिपूर्ण विरोध को कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर दबाने की कोशिश की जा रही है। खेड़ा ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
अस्पताल ने स्वास्थ्य पर दी अपडेट
सफदरजंग अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लंबे समय से जारी उपवास की वजह से सोनम वांगचुक में हल्की कमजोरी, डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के संकेत मिले हैं। अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारु बंबा ने बताया कि फिलहाल वांगचुक की स्थिति स्थिर है। सभी जरूरी स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं और वह पूरी तरह होश में हैं। डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है और आवश्यक उपचार जारी है।
21 दिनों से जारी है अनशन
सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका आंदोलन परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं की जांच और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शनिवार सुबह उन्हें मेडिकल जांच और इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।




