The Red Ink
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने दावा किया है कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को “हमेशा के लिए खोल रहे हैं” और इस कदम का स्वागत चीन ने भी किया है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब Iran ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी और कहा था कि अगर दबाव जारी रहा तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।
ट्रंप का दावा: “दुनिया के लिए खोल रहा हूं रास्ता”
15 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए Donald Trump ने कहा कि चीन इस फैसले से “बहुत खुश” है। उन्होंने संकेत दिया कि बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच सहयोग बेहतर हो रहा है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि वे यह कदम सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हित में उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि China ने ईरान को हथियार सप्लाई न करने पर सहमति जताई है। उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही चीन दौरे के दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रपति Xi Jinping से होगी और दोनों देश “समझदारी से” साथ काम करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका लड़ने में भी सक्षम है।

ईरान की चेतावनी: जलमार्ग बंद करने की बात
ट्रंप के बयान से पहले ही Iran के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अली अब्दुल्लाही ने बड़ा बयान देते हुए कहा था कि ईरान फारस की खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर जैसे अहम समुद्री रास्तों को बंद कर सकता है। उन्होंने साफ कहा कि देश अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए “निर्णायक कदम” उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान ने पहले ही क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया था।
सीजफायर पर भी मंडरा रहा संकट
Associated Press की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच जारी नाजुक सीजफायर को बचाने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। 22 अप्रैल की डेडलाइन से पहले दोनों पक्ष बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, मौजूदा हालात में कई मुद्दे अब भी अटके हुए हैं जैसे ईरान का परमाणु कार्यक्रम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा और युद्ध से जुड़े मुआवजे के सवाल।
ईरान की चेतावनियों और अमेरिकी दावों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक टकराव का केंद्र बनता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीति इस तनाव को कम करती है या हालात और बिगड़ते हैं।




