The Red Ink
एक चपरासी और करोड़ों का खेल! उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में सामने आया यह मामला सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोर नसों को उजागर करता है। इल्हाम उर्र रहमान शम्सी नाम का यह कर्मचारी, जो कागज़ों में एक साधारण चपरासी था, असल में सरकारी फंड के साथ ऐसा खेल खेल रहा था जिसे समझने में अब अधिकारियों के भी पसीने छूट रहे हैं।
सैलरी सिस्टम में सेंध, 53 खातों में बहा पैसा
जांच में सामने आया कि आरोपी ने वेतन भुगतान सिस्टम को ही अपना हथियार बना लिया। फर्जी लाभार्थियों के नाम जोड़कर उसने 53 अलग-अलग बैंक खातों में 5 करोड़ रुपये से ज्यादा ट्रांसफर कर दिए। यह कोई एक-दो बार की गलती नहीं थी, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया आर्थिक खेल था, जो लंबे समय तक बिना पकड़े चलता रहा।
पत्नी को बना दिया ‘सरकारी टीचर’
घोटाले का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा आरोपी ने अपनी ही पत्नी अर्शी खातून को रिकॉर्ड में टीचर दिखा दिया। असल में वह टीचर नहीं थी लेकिन सिस्टम में नाम और अकाउंट जोड़ते ही सरकारी सैलरी सीधे उसके खाते में पहुंचने लगी। कुल मिलाकर 1 करोड़ 1 लाख 95 हजार 135 रुपये इस फर्जी पहचान के जरिए ट्रांसफर किए गए।
प्रॉपर्टी तक पहुंचा पैसा, जांच और गहरी
सिर्फ खातों तक सीमित नहीं जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने इन पैसों का इस्तेमाल प्रॉपर्टी खरीदने में किया।
कई बिल्डर्स को ट्रांजैक्शन किए जाने की बात सामने आई है, जिससे साफ है कि यह घोटाला सिर्फ “सैलरी स्कैम” नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है।
कैसे बना सिस्टम का ‘अंदरूनी खिलाड़ी’?
साल 2014- यहीं से कहानी मोड़ लेती है। इल्हाम ने DIOS में पोस्टिंग हासिल की और धीरे-धीरे अधिकारियों का भरोसेमंद बन गया। मीटिंग्स में पहुंच, अंदरूनी प्रक्रियाओं की जानकारी और सिस्टम तक सीधी पहुंच, यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई और इसी ताकत का इस्तेमाल उसने करोड़ों के गबन में किया।
बैंक की नजर पड़ी, खेल खुल गया
इतना बड़ा खेल चलता रहता अगर एक छोटी सी चीज पकड़ में न आती। जब अर्शी खातून के खाते में लगातार भारी रकम आने लगी, तो बैंक को शक हुआ। जांच में पाया गया कि सबसे बड़े ट्रांजैक्शन DIOS ऑफिस से ही जुड़े हैं। इसके बाद मामला सीधे जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह तक पहुंचा और यहीं से पूरा खेल उजागर हो गया।
FIR, गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
DIOS अधिकारी राजीव कुमार ने पुष्टि की कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, करीब 5.28 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आ चुकी है और 50 से ज्यादा खाते संदिग्ध पाए गए हैं। एसपी सुकीर्ति माधव ने बताया कि आरोपी ने पहले अग्रिम जमानत ली थी, लेकिन अब सरेंडर कर चुका है। संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया गया है और जिन संपत्तियों में पैसा लगा, वहां भी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
ट्रेजरी पर भी सवाल, जवाब आधा-अधूरा
इस पूरे खेल में ट्रेजरी विभाग पर भी सवाल उठे इतना पैसा बिना जांच कैसे निकल गया? वरिष्ठ कोषाधिकारी संजय यादव ने सफाई देते हुए कहा कि उनका काम सिर्फ बिल प्रोसेस करना है, लाभार्थी की पहचान जांचने का सिस्टम उनके पास नहीं है।
यानी सवाल अब भी बाकी है गलती सिस्टम की थी या सिस्टम का इस्तेमाल किया गया?
एक चपरासी द्वारा किया गया यह घोटाला सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि सिस्टम की परतों में छिपी लापरवाही और लूपहोल्स की कहानी है। जांच आगे बढ़ेगी तो सवाल और भी निकलेंगे और शायद जवाब भी।




