Women Reservation को लेकर स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के बीच सियासी बहस तेज हो गई है। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण लागू कराने में सहयोग की अपील की, जिसके बाद कांग्रेस ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पहले ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और अब इसके क्रियान्वयन में देरी के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है।
लाल किले से पीएम मोदी की अपील
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के सभी राजनीतिक दलों को महिला सम्मान और महिला सशक्तिकरण के लिए एकजुट होकर महिला आरक्षण लागू करने में सहयोग देना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अधिक भागीदारी दिलाने के लिए सभी दलों को आगे आना चाहिए।
कांग्रेस का पलटवार
प्रधानमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सितंबर 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के दोहरे रवैये के कारण यह कानून 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू नहीं हो सका। जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस लगातार यह मांग करती रही है कि मौजूदा लोकसभा सीटों के भीतर ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए।
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम?
केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में संसद में नारी शक्ति वंदन विधेयक पेश किया था। इस विधेयक को कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दलों के समर्थन से संसद के दोनों सदनों से पारित कर दिया गया था।
इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, इसके लागू होने को भविष्य की जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था, जिसके कारण इसके क्रियान्वयन को लेकर लगातार राजनीतिक बहस होती रही है।
2026 के विशेष सत्र का भी जिक्र
कांग्रेस का कहना है कि अप्रैल 2026 में बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन प्रस्ताव को संसद से मंजूरी नहीं मिल सकी थी।
पार्टी का आरोप है कि सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल नहीं रही, जिसके कारण महिला आरक्षण के मुद्दे पर अनिश्चितता बनी रही।
राजनीतिक बहस फिर तेज
महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार इसे महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि कानून पारित होने के बावजूद इसे लागू करने में देरी की जा रही है।
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी की अपील और कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।




