The Red Ink
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक फेरबदल के बीच एक अहम नियुक्ति ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रहे Manoj Kumar Agrawal को अब राज्य का मुख्य सचिव बनाया गया है। इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और चुनाव प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
कौन हैं मनोज अग्रवाल
1990 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल लंबे समय से प्रशासनिक सेवाओं में सक्रिय रहे हैं और कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। चुनाव के दौरान उनके कार्यकाल में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान चलाया गया था, जिसके तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे। यही अभियान सबसे ज्यादा विवाद का कारण भी बना।
SIR अभियान बना विवाद की जड़
मतदाता सूची में संशोधन के इस अभियान को लेकर विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए थे। दावा किया गया कि लाखों लोग वोट डालने से वंचित रह गए। हालांकि, कुछ वर्गों ने शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए अग्रवाल की कार्यशैली की सराहना भी की थी। इसी पृष्ठभूमि में उनकी मुख्य सचिव पद पर नियुक्ति को लेकर अब नई बहस छिड़ गई है।
प्रशासनिक बदलावों की श्रृंखला
राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा मुख्य सचिव Dushyant Nariala को दिल्ली में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर बनाया गया है। वहीं, चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक रहे Subrata Gupta को मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari का सलाहकार नियुक्त किया गया है।
विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी सांसद Sagarika Ghose ने इसे “निष्पक्षता पर सवाल” बताते हुए कहा कि चुनाव कराने वाले अधिकारी को शीर्ष प्रशासनिक पद देना चिंताजनक है। टीएमसी नेता Saket Gokhale ने आरोप लगाया कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने इसे चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल के बीच “सांठगांठ” का संकेत बताया।
बीजेपी ने किया बचाव
वहीं सत्ताधारी दल Bharatiya Janata Party ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मनोज अग्रवाल राज्य के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से हैं और उनकी नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुरूप की गई है। पार्टी का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
अन्य बड़े फैसले भी लागू
इसी के साथ राज्य सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लेते हुए विभिन्न बोर्ड, निगम और संगठनों में नामित सदस्यों के कार्यकाल को समाप्त करने की घोषणा की है। साथ ही, 60 वर्ष की आयु के बाद सेवा विस्तार पर काम कर रहे अधिकारियों की सेवाएं भी खत्म करने का फैसला लिया गया है।
नई सरकार की प्राथमिकताएं
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया कि शासन में पारदर्शिता और खुलापन बनाए रखा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से बेझिझक अपनी राय रखने की अपील भी की।




