Vande Mataram Resolution पर बीजेपी का बड़ा प्रस्ताव…
Vande Mataram Resolution को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 22 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। पार्टी ने कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के उस फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसमें कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरों के गायन से जुड़े 1937 के प्रस्ताव को दोहराया गया था।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रस्ताव की जानकारी साझा करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक है।
Vande Mataram Resolution में राष्ट्रीय गीत के सम्मान पर जोर
Vande Mataram Resolution में बीजेपी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसके पूर्ण सम्मान, गरिमा और राष्ट्रीय महत्व को बनाए रखना पार्टी की प्रतिबद्धता है।
प्रस्ताव में कहा गया कि राष्ट्रीय गीत की संवैधानिक और वैधानिक स्थिति का सम्मान किया जाना चाहिए। पार्टी का दावा है कि संविधान सभा की 1950 की घोषणा और संसद द्वारा वर्ष 2026 में किए गए संशोधन ने ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण प्रदान किया है।
कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप
बीजेपी ने अपने प्रस्ताव में कांग्रेस पर सांप्रदायिक दबाव और वोट बैंक की राजनीति के आगे झुकने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस कार्यसमिति का कोई भी प्रस्ताव संविधान, संसद या देश के कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।
प्रस्ताव में कहा गया कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीतों को राजनीतिक लाभ के लिए विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।
ऐतिहासिक संदर्भों का भी किया उल्लेख
Vande Mataram Resolution में बीजेपी ने 1937 में ‘वंदे मातरम’ को लेकर हुए विवाद और उसके ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया। प्रस्ताव में मुस्लिम लीग की आपत्तियों और उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र किया गया है।
पार्टी ने यह भी दावा किया कि महात्मा गांधी ने ‘वंदे मातरम’ को साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलन की प्रेरणा और शुद्ध राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बताया था।
राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आया ‘वंदे मातरम’ विवाद
कांग्रेस और बीजेपी के बीच ‘वंदे मातरम’ को लेकर बढ़ा विवाद अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। बीजेपी जहां पूरे गीत के सम्मान और उसके राष्ट्रीय महत्व पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस अपने ऐतिहासिक रुख का हवाला दे रही है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और वैचारिक बहस को और तेज कर सकता है।




