The Red Ink:
डिप्टी सीएम के तंज से भड़के सपा सदस्य, वेल में पहुंचकर लगाए ‘चंदा चोर, गद्दी छोड़’ के नारे…
मानसून सत्र के पहले दिन राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा छाया, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक…
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन विधान परिषद में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासी घमासान देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। इस दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की टिप्पणी के बाद सपा सदस्य नाराज हो गए और नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए।
हंगामे के बीच सपा सदस्यों ने ‘चंदा चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाए। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी के कारण कुछ देर तक सदन का माहौल काफी गर्म रहा।
केशव मौर्य ने सपा पर साधा निशाना
विधान परिषद में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर के मुद्दे पर सपा को घेरते हुए कहा कि अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर लंबे संघर्ष के बाद बना है।
उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग पहले राम मंदिर के निर्माण का विरोध करते रहे, वे अब चढ़ावे से जुड़े मामले को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
केशव मौर्य ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण से कुछ लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने मथुरा और काशी को लेकर भी टिप्पणी की। इसके बाद सपा सदस्यों ने विरोध तेज कर दिया और वेल में पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी।
हंगामे के दौरान केशव मौर्य ने सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी सदस्य ऐसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जैसे कथित तौर पर गायब हुई रकम उनकी अपनी हो। जवाब में सपा सदस्यों ने भी सरकार पर पलटवार करते हुए चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर सवाल उठाए।
सपा ने मुख्य आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया
सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने सदन में कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और श्रद्धालु विश्वास के साथ वहां चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी गंभीर मामला है और इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद मुख्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर सवाल बने हुए हैं। सपा नेता ने आरोप लगाया कि जांच की कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रखी जा रही है और बड़े लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है।
आशुतोष सिन्हा ने कथित तौर पर सीसीटीवी फुटेज हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया और मांग की कि मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी, अधिकारी या प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई होनी चाहिए।
‘कार्रवाई केवल छोटे लोगों तक सीमित’
सपा एमएलसी मुकुल यादव ने भी चढ़ावे के मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक की कार्रवाई छोटे स्तर के लोगों तक सीमित रही है, जबकि पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने के लिए व्यापक जांच की जरूरत है।
वहीं, सपा नेता लाल बिहारी यादव ने मंदिर ट्रस्ट की संरचना और उसके कामकाज को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के गठन के बाद से ही अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनके बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विरोध जताया।
विधानसभा के बाहर दानपेटी लेकर पहुंचे सपा-कांग्रेस विधायक
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सपा और कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अपने साथ एक दानपेटी लेकर पहुंचे, जिसमें चिल्लर रखी गई थी। उनके हाथों में ‘नीट है या चीट है’ और ‘राम के नाम पर लूट है’ जैसे संदेश लिखे पोस्टर भी थे।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘आरंभ ही प्रचंड है।’
सीएम योगी ने विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब
विधानमंडल सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन दलों के शासनकाल में किसानों के हित प्रभावित हुए, वे अब किसानों की चिंता जताने का दावा कर रहे हैं।
उन्होंने विपक्ष के रुख को दोहरा चरित्र बताया।
मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा और कहा कि जिन लोगों के कार्यकाल में रामभक्तों पर गोली चलने की घटनाएं हुईं, वे अब राम मंदिर से जुड़े मामलों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसान, युवा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।
दिवंगत विधायकों को दी गई श्रद्धांजलि
विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से सपा विधायक रहे आलमबदी के निधन पर शोक प्रस्ताव रखा गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सदन में दो मिनट का मौन भी रखा गया। मुख्यमंत्री ने आलमबदी को अनुभवी जनप्रतिनिधि और समाजसेवी बताते हुए उनके निधन को प्रदेश के लिए क्षति बताया।
दोबारा शुरू हुई कार्यवाही में 94 बिंदुओं का निस्तारण
दोपहर में सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, जो शाम तक चली। इस दौरान किसी बड़े मुद्दे पर विस्तृत चर्चा नहीं हुई। कार्यसूची में शामिल 94 बिंदुओं का निस्तारण किया गया। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र 6 अगस्त तक चलेगा। मंगलवार को प्रश्नकाल के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। सत्र के दौरान कई अध्यादेशों पर भी चर्चा और मंजूरी की प्रक्रिया हो सकती है। इसके अलावा संभल दंगों की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखे जाने की संभावना है।




