यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन से पहले सीटों पर सियासत तेज, कांग्रेस बोली- जूनियर पार्टनर नहीं, बराबरी की हिस्सेदारी चाहिए

The Red Ink
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन INDIA में सीट बंटवारे को लेकर हलचल शुरू हो गई है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में सिर्फ छोटे सहयोगी की भूमिका में नहीं रहना चाहती। पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ ही ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गई है।

कांग्रेस की नजर बराबरी की सीटों पर
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बयान के बाद गठबंधन की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उनकी इच्छा है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा बराबरी के आधार पर हो। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान और गठबंधन के शीर्ष नेता करेंगे, लेकिन उनके बयान से पार्टी की रणनीति के संकेत मिल रहे हैं।

‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका स्वीकार नहीं करेगी कांग्रेस
कांग्रेस का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में गठबंधन के प्रदर्शन के बाद उसकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई है। पार्टी अब खुद को सिर्फ सहयोगी दल के तौर पर नहीं बल्कि एक अहम साझेदार के रूप में पेश करना चाहती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी प्रदेश में अपना संगठन विस्तार कर रही है और आने वाले विधानसभा चुनाव में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभाने की तैयारी है।

170 सीटों पर संगठन मजबूत करने की तैयारी
कांग्रेस ने यूपी में चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी करीब 170 विधानसभा सीटों पर विशेष रूप से संगठनात्मक काम शुरू करने की तैयारी में है। इन सीटों पर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने और पार्टी का जनाधार बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है।

सपा की मजबूत स्थिति, लेकिन कांग्रेस चाहती है बड़ा हिस्सा
वहीं समाजवादी पार्टी यूपी में खुद को विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा मानती है। पार्टी के पास मजबूत संगठन, कार्यकर्ता नेटवर्क और विधानसभा चुनावों का लंबा अनुभव है। सपा नेताओं का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद विधानसभा चुनाव में सीटों का आधार जमीनी ताकत और संगठन क्षमता होगी।

2024 लोकसभा चुनाव में सफल रहा था गठबंधन
2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कड़ी चुनौती दी थी। समाजवादी पार्टी ने 62 सीटों पर चुनाव लड़कर 37 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने 17 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस का दावा है कि यूपी में उसकी वापसी हुई है और उसे गठबंधन में पहले से ज्यादा महत्व मिलना चाहिए।

मायावती को साथ लाने की कोशिश का भी संकेत
राजेंद्र पाल गौतम ने बहुजन एकता की बात करते हुए बसपा प्रमुख मायावती को भी विपक्षी एकजुटता में शामिल होने का संकेत दिया था। कांग्रेस की रणनीति दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने की है। पार्टी को उम्मीद है कि इससे यूपी में उसका राजनीतिक आधार बढ़ेगा।

बीजेपी ने शुरू किया हमला
कांग्रेस के रुख के बाद बीजेपी ने INDIA गठबंधन पर निशाना साधा है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्षी गठबंधन चुनाव से पहले ही सीटों और नेतृत्व को लेकर उलझता नजर आ रहा है। बीजेपी ने 2017 के सपा-कांग्रेस गठबंधन का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्षी दलों के बीच तालमेल की चुनौती पहले भी सामने आ चुकी है।

चुनाव से पहले गठबंधन की असली परीक्षा
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता सबसे बड़ी चुनौती होगी। जहां सपा अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस ज्यादा सीटों और बड़ी भूमिका की मांग के साथ मैदान में उतर रही है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि अखिलेश यादव और कांग्रेस नेतृत्व के बीच सीट शेयरिंग को लेकर किस तरह सहमति बनती है।

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