यूपी विधानसभा में सियासी संग्राम: योगी-पाठक का विपक्ष पर हमला, महिला आरक्षण को लेकर गरमाया माहौल

The Red Ink
उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया। नारी सशक्तिकरण और महिला आरक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टकराहट देखने को मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर सीधा हमला बोला।

पाठक का भावनात्मक दांव और बड़ा आरोप
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सदन में हाथ जोड़कर विपक्ष से अपील की कि वे महिलाओं को संसद तक पहुंचाने में सहयोग करें। इसी दौरान उन्होंने 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि “सपा के गुंडे मायावती की हत्या तक करना चाहते थे,” और दावा किया कि उस समय भाजपा के हस्तक्षेप से उनकी जान बच सकी। उन्होंने यह भी कहा कि सपा के दौर में अपराध और अराजकता का माहौल था, जिसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा।

योगी का विपक्ष पर तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सपा, कांग्रेस और INDIA गठबंधन को “आधी आबादी का विरोधी” करार दिया। उन्होंने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए। योगी ने शाहबानो केस का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के चलते न्याय से समझौता किया, जिसका खामियाजा आज भी पार्टी भुगत रही है।

महिला सुरक्षा और योजनाओं का जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि 2017 के बाद प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव आया है।
उन्होंने शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना और जनधन खातों का जिक्र करते हुए कहा कि इन कदमों ने महिलाओं के जीवन में ठोस बदलाव लाया है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग पहले इन योजनाओं का मजाक उड़ाते थे, आज वही आरक्षण की बात कर रहे हैं।

सदन में हंगामा और नारेबाजी
सत्र की शुरुआत से पहले ही विधानसभा का माहौल गरमा गया। भाजपा और सपा विधायक आमने-सामने आ गए और जमकर नारेबाजी हुई। सपा विधायक महिला आरक्षण कानून को लागू करने की मांग कर रहे थे, जबकि भाजपा विधायक विपक्ष के विरोध को मुद्दा बना रहे थे। भाजपा की महिला विधायक हाथों में नारे लिखे पोस्टर लेकर पहुंचीं, वहीं सपा विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष और डिप्टी सीएम का घेराव किया।

विपक्ष का पलटवार
कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने सत्र की अवधि पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे अहम मुद्दे पर सीमित समय देना उचित नहीं है। वहीं नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने तर्क दिया कि महिला आरक्षण बिल केंद्र का विषय है, इसलिए राज्य विधानसभा में इस पर चर्चा का औचित्य नहीं बनता।

राजनीतिक संदेश और रणनीति
विशेष सत्र के जरिए भाजपा ने साफ संकेत देने की कोशिश की है कि वह खुद को महिलाओं के हितैषी के रूप में पेश करना चाहती है, जबकि विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आगामी चुनावों को देखते हुए महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति के तहत यह सत्र अहम भूमिका निभा सकता है।

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