Trump Iran Crisis: ईरान को लेकर अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर एक बार फिर बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सरकार अपनी सेना के बड़े हिस्से को वेतन नहीं दे पा रही है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने इसे बड़ा मानवीय संकट बताते हुए तत्काल रोकने की जरूरत बताई।
ट्रंप के इस बयान के बीच अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ नए और व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक नई कार्रवाई का मकसद ईरानी शासन की आर्थिक क्षमता पर दबाव बढ़ाना है।
Trump Iran Crisis में ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए। ट्रंप के मुताबिक, ईरान का इस्लामिक रिपब्लिक अपनी सेना के बड़े हिस्से को वेतन नहीं दे रहा है।
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरानी सत्ता प्रदर्शनकारियों की हत्या कर रही है और यहां तक कि ऐसे लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जो उस समय प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे बहुत बड़ा मानवीय संकट बताते हुए कहा कि इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। हालांकि, सेना के बड़े हिस्से को वेतन नहीं दिए जाने और प्रदर्शनकारियों की मौत से जुड़े ये दावे ट्रंप के आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए।
ईरान पर ट्रंप पहले भी साध चुके हैं निशाना
Trump Iran Crisis के बीच ट्रंप इससे पहले भी ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को लेकर कड़े बयान दे चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि ईरान सैन्य रूप से बुरी तरह तबाह हो चुका है और अब नए आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए उसकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ाया जाएगा।
अब अमेरिकी प्रशासन का फोकस आर्थिक मोर्चे पर दिखाई दे रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए कई क्षेत्रों और ईरान से जुड़े नेटवर्क को निशाना बनाया है।
Scott Bessent ने बढ़ाया आर्थिक शिकंजा
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान के खिलाफ नई प्रतिबंध नीति की घोषणा की। अमेरिकी ट्रेजरी ने इसे “Operation Economic Outcast” नाम दिया है।
अमेरिकी सरकार के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा अलग-थलग करना है। नई कार्रवाई में करीब 60 ईरान से जुड़े व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम, साइबर गतिविधियों और तेल से जुड़े नेटवर्क को निशाना बनाया गया है।
पांच बड़े सेक्टर पर अमेरिका की नजर
नई अमेरिकी प्रतिबंध नीति में डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग जैसे क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ाने की बात कही गई है।
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन क्षेत्रों का इस्तेमाल ईरान राजस्व जुटाने, प्रतिबंधों से बचने या आर्थिक दबाव को कम करने के लिए करता है।
वॉशिंगटन ने यह भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले दूसरे देशों और संस्थाओं पर भी सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
अमेरिका की रणनीति में आया बड़ा बदलाव?
Trump Iran Crisis के मौजूदा दौर में अमेरिका की रणनीति में आर्थिक दबाव का हिस्सा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक, नई कार्रवाई का उद्देश्य ईरानी शासन के लिए वित्तीय संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्तों को सीमित करना है।
स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वालों पर भी कार्रवाई कर सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वॉशिंगटन दूसरे देशों को ईरान से जुड़े कारोबार को बंद करने के लिए समयसीमा देने और ऐसा नहीं करने पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है।
ईरान पर आर्थिक दबाव क्यों बढ़ा रहा अमेरिका?
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि आर्थिक दबाव के जरिए ईरानी सरकार की आय और सैन्य क्षमता को कमजोर किया जा सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी पहले भी ईरान के तेल कारोबार, वित्तीय नेटवर्क और सैन्य खरीद से जुड़े नेटवर्क पर प्रतिबंध लगा चुका है।
नई कार्रवाई इसी व्यापक दबाव अभियान का विस्तार है। अमेरिका अब ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़े विदेशी नेटवर्क और उसके साथ कारोबार करने वाली संस्थाओं को भी निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान की प्रतिक्रिया भी आई सामने
अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह नए आर्थिक दबाव का सामना करने के लिए तैयार है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की है और कहा है कि वॉशिंगटन का मकसद ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है।
इस तरह Trump Iran Crisis अब सिर्फ सैन्य तनाव तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ आर्थिक प्रतिबंध, तेल कारोबार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ईरान के विदेशी साझेदार भी इस टकराव का अहम हिस्सा बन गए हैं।
आगे क्या होगा?
ट्रंप के ताजा आरोपों और बेसेंट के नए प्रतिबंधों के बाद अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ने की संभावना बनी हुई है। एक तरफ अमेरिका आर्थिक दबाव को और व्यापक करने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान इन कदमों का विरोध कर रहा है।
फिलहाल ट्रंप के सेना को वेतन न मिलने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई वाले दावों को उनके आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और ईरान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया इस पूरे मामले को समझने में अहम होगी।




