Sugar Price Hike: रक्षाबंधन से पहले लखनऊ में चीनी ₹25 किलो महंगी, मिठाई कारोबारियों के सामने बढ़ा संकट

Sugar Price Hike: रक्षाबंधन से ठीक पहले लखनऊ में चीनी के दाम में तेज उछाल ने मिठाई और चाय कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 25 दिन पहले ₹45-48 किलो बिक रही चीनी अब लगभग ₹70 किलो पहुंच गई है।

यानी कीमत में करीब ₹25 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। त्योहार के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने के बावजूद कारोबारी फिलहाल कीमत बढ़ाने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि अगर रक्षाबंधन से पहले मिठाई महंगी की गई तो ग्राहक कम हो सकते हैं और अगर दाम नहीं बढ़ाए गए तो बढ़ी लागत का सीधा असर मुनाफे पर पड़ेगा।

रक्षाबंधन से पहले चीनी के दाम ने बढ़ाई चिंता

रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है और इस दौरान मिठाई की बिक्री आम दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। ऐसे समय में चीनी की कीमत में अचानक आई तेजी ने मिठाई कारोबारियों का हिसाब-किताब बिगाड़ दिया है।

कारोबारियों के मुताबिक, करीब 25 दिन पहले चीनी ₹45 से ₹48 प्रति किलो के आसपास मिल रही थी। अब यही चीनी लगभग ₹70 किलो पहुंच गई है। ऐसे में मिठाई बनाने की लागत बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन त्योहार से ठीक पहले कीमत बढ़ाना कारोबारियों के लिए आसान फैसला नहीं है।

‘दाम बढ़ाए तो ग्राहक कम हो सकते हैं’

शर्मा स्वीट्स के मालिक दिनेश शर्मा के मुताबिक रक्षाबंधन सिर पर है और इसी समय चीनी के दाम बढ़ने से कारोबारियों के सामने मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है।

उनका कहना है कि त्योहार से ठीक पहले मिठाई की कीमत बढ़ाने पर ग्राहक नाराज हो सकते हैं। कारोबारी एक तरफ बढ़ी हुई लागत झेल रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्राहकों पर अचानक अतिरिक्त बोझ डालने से भी बचना चाहते हैं।

यही वजह है कि फिलहाल कई दुकानदार बढ़ी हुई चीनी की कीमत का भार खुद उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

महंगी चीनी से कारोबार का बजट बिगड़ा

मिठाई कारोबारी रोली शुक्ला ने कहा कि शक्कर के दाम बढ़ने के बावजूद कारोबार की बाकी जरूरतें कम नहीं हुई हैं। उनके मुताबिक, दुकानदार अचानक मिठाई के दाम नहीं बढ़ा सकते, क्योंकि इससे ग्राहक प्रभावित हो सकते हैं।

उनका कहना है कि महंगी चीनी खरीदकर मिठाई तैयार करने से लागत लगातार बढ़ रही है। अगर यही स्थिति आगे भी बनी रहती है तो इसका असर कारोबारियों के मुनाफे पर पड़ेगा।

‘जमाखोरी से महंगी हुई चीनी’

छप्पन भोग के शेखर गुप्ता ने चीनी की कीमतों में त्योहार के समय हुई तेजी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार के बीच अचानक कीमत बढ़ना कारोबारियों के लिए परेशानी पैदा करता है।

उन्होंने सरकार से इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की। शेखर गुप्ता के मुताबिक, महंगी चीनी का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल रक्षाबंधन तक मिठाई के दाम बढ़ाने की योजना नहीं है।

उन्होंने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे जमाखोरी की आशंका भी जताई।

चीनी के साथ चायपत्ती और दूध ने भी बढ़ाई परेशानी

Sugar Price Hike का असर सिर्फ मिठाई कारोबार तक सीमित नहीं है। चाय बेचने वाले छोटे दुकानदार भी बढ़ी हुई कीमत से परेशान हैं।

चाय विक्रेता जयप्रकाश ने बताया कि छोटे दुकानदारों के लिए चीनी के दाम में ₹25 प्रति किलो की बढ़ोतरी काफी बड़ी है। जब चीनी ₹45-48 किलो थी, तब कारोबार में किसी तरह थोड़ा मुनाफा बच जाता था, लेकिन अब लागत लगातार बढ़ रही है।

उनके मुताबिक, परेशानी सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। चायपत्ती और दूध के दाम भी बढ़े हैं, जबकि सिलेंडर की लागत पहले से ही ज्यादा है। ऐसे में छोटे दुकानदारों के लिए मुनाफा बचाना मुश्किल होता जा रहा है।

मिठाई के दाम बढ़ने का भी खतरा

कारोबारियों के मुताबिक, अगर रक्षाबंधन के बाद भी चीनी की कीमत इसी स्तर पर बनी रहती है तो मिठाइयों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।

चाय विक्रेता जयप्रकाश ने बताया कि महंगाई का असर मिठाई की कीमतों पर भी पड़ सकता है। उनके मुताबिक, जो मिठाई अभी करीब ₹500 किलो बिक रही है, उसकी कीमत बढ़कर ₹700 किलो तक पहुंच सकती है।

हालांकि, फिलहाल कारोबारी त्योहार के बीच कीमत बढ़ाने से बच रहे हैं। उनका मानना है कि रक्षाबंधन के समय ग्राहक पहले से ही खरीदारी के लिए बाजार में आ रहे हैं और इसी दौरान कीमत बढ़ाने से बिक्री प्रभावित हो सकती है।

कारोबारियों के सामने दोहरी चुनौती

लखनऊ के मिठाई और चाय कारोबारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लागत और ग्राहक के बीच संतुलन बनाने की है। चीनी की कीमत में करीब ₹25 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी सीधे उत्पादन लागत को प्रभावित कर रही है।

लेकिन दूसरी तरफ कारोबारियों को यह भी डर है कि अगर इस बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डाला गया तो बिक्री कम हो सकती है। ऐसे में फिलहाल कारोबारी त्योहार तक स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

अगर रक्षाबंधन के बाद भी चीनी के दाम नीचे नहीं आते हैं, तो मिठाई की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में त्योहार के बाद महंगी चीनी का असर सीधे आम ग्राहक की जेब पर दिखाई दे सकता है।

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