त्योहारों से पहले चीनी की महंगाई पर सियासत तेज…
Sugar Price Hike को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की बढ़ती कीमतों, घटते स्टॉक और विदेशों से चीनी आयात किए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, तब देश को 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि त्योहारों के मौसम से पहले आम जनता महंगी चीनी खरीदने को मजबूर है और सरकार की नीतियों की वजह से हालात बिगड़े हैं।
Sugar Price Hike पर खड़गे के तीन बड़े सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से तीन अहम सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसा क्यों हुआ कि भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। साथ ही उन्होंने पूछा कि जब सरकार आत्मनिर्भर भारत की बात करती है तो फिर विदेशों से चीनी आयात करने की नौबत क्यों आई।
खड़गे ने एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ देश में चीनी की कमी की बात हो रही है और दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में गन्ने को एथेनॉल उत्पादन में लगाया जा रहा है।
तीन महीने में 40 फीसदी तक बढ़े चीनी के दाम
देश के कई हिस्सों में चीनी की खुदरा कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। बीते तीन महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी यानी लगभग 19 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी है। सरकार को उम्मीद है कि इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
गुड़, चावल और मक्के का आटा भी हुआ महंगा
महंगाई का असर केवल चीनी तक सीमित नहीं है। पिछले तीन महीनों में गुड़ की कीमतों में करीब 24 फीसदी, चावल में 16 फीसदी और मक्के के आटे में 11 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक में कमी और त्योहारों से पहले मांग बढ़ने की वजह से कीमतों में तेजी आई है। पिछले सीजन में मिलों के पास जहां 47 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक था, वहीं इस बार यह घटकर 32 लाख टन रह गया।
सरकार ने एथेनॉल को नहीं माना जिम्मेदार
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार, घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम की मार, गन्ने की फसल को हुआ नुकसान और त्योहारों से पहले बढ़ी मांग कीमतों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत 48 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 56 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं एक्स-मिल कीमत भी तेजी से बढ़ी है।
Sugar Price Hike के बीच उत्पादन में गिरावट
सरकारी अनुमान के मुताबिक 2025-26 सीजन में देश का चीनी उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन का था। गन्ने की फसल पर रेड रॉट बीमारी, टॉप बोरर और अत्यधिक बारिश का असर पड़ा है, जिससे उत्पादन घटा है।
हालांकि सरकार का दावा है कि सितंबर 2026 के अंत तक 33 से 35 लाख टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध रहेगा, जो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।
अक्टूबर से सुधर सकती है स्थिति
सरकार के अनुसार नया पेराई सत्र 15 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद बाजार में 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी आने की संभावना है, जिससे आपूर्ति बेहतर होगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की गई है ताकि त्योहारों के दौरान बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो।




