यूपी विधानसभा के 4 दिन के सत्र पर सपा का सवाल, सर्वदलीय बैठक से बनाई दूरी; रविदास मेहरोत्रा बोले- 25 करोड़ लोगों के मुद्दे कैसे उठेंगे?

The Red Ink:

मानसून सत्र से पहले सपा ने सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया, राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाने की मांग…

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सियासी तकरार तेज हो गई है। रविवार को सत्र की तैयारियों को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से समाजवादी पार्टी ने दूरी बना ली। बैठक में सपा का कोई भी विधायक शामिल नहीं हुआ।

सपा ने विधानसभा सत्र की अवधि को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए चार दिन का सत्र पर्याप्त नहीं है। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर सत्र को छोटा रखकर महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत बहस से बचना चाहती है।

उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू होकर 6 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट पेश किए जाने के साथ कई विधायी और सरकारी कामकाज प्रस्तावित हैं।

कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सपा ने उठाया राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा

सर्वदलीय बैठक से पहले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई। इसमें सत्र के दौरान होने वाले कामकाज और सदन के एजेंडे पर चर्चा की गई।

सपा ने इस बैठक में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े मामले पर सदन में चर्चा कराने की मांग रखी। पार्टी का कहना है कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है और सरकार को इस पर विधानसभा में जवाब देना चाहिए।

रविदास मेहरोत्रा बोले- इतने कम समय में जनता की समस्याओं पर चर्चा संभव नहीं

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े प्रदेश के मुद्दों को चार दिन के सत्र में प्रभावी ढंग से उठाना संभव नहीं है। मेहरोत्रा के मुताबिक, सरकार ने सत्र की अवधि कम रखकर सदन में व्यापक चर्चा की संभावना सीमित कर दी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बहस हो। इसी वजह से विधानसभा का सत्र छोटा रखा गया है।

3 से 6 अगस्त तक चलेगा विधानसभा का मानसून सत्र

उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र चार दिनों तक चलेगा। सत्र के दौरान अलग-अलग दिन अलग विधायी और वित्तीय कामकाज तय किए गए हैं।

3 अगस्त को सदन की कार्यवाही दिवंगत विधायकों को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू होगी। 4 अगस्त को सरकार की ओर से अध्यादेश, अधिसूचनाएं, नियम और अन्य जरूरी दस्तावेज विधानसभा के पटल पर रखे जाएंगे। इस दिन नए विधेयक भी पेश किए जा सकते हैं। दोपहर 12:20 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट की मांगें सदन में रखी जाएंगी।

5 अगस्त को मुख्य रूप से विधायी कामकाज होगा। इस दौरान नए कानूनों और विधेयकों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की जा सकती है। जरूरत के अनुसार अन्य सरकारी कार्य भी लिए जाएंगे।

6 अगस्त को अनुपूरक बजट की मांगों पर चर्चा होगी। इसके बाद मांगों पर मतदान कराया जाएगा। अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक को सदन में पेश कर उस पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

विधानसभा में पेश हो सकते हैं 9 अध्यादेश

मानसून सत्र के दौरान सरकार कई अध्यादेशों को विधानसभा से पारित कराने की तैयारी में है। इनमें उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय से जुड़ा द्वितीय अध्यादेश भी शामिल है।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश दंड विधि में संशोधन, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में तीसरे और चौथे संशोधन तथा उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण से जुड़े संशोधन अध्यादेशों पर भी सदन में कामकाज हो सकता है। निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित कई संशोधन अध्यादेश भी विधानसभा में पेश किए जा सकते हैं।

सत्र से पहले भाजपा की रणनीतिक बैठकों का दौर

विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले भाजपा ने भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। रविवार शाम मुख्यमंत्री आवास पर भाजपा सचेतक दल की बैठक प्रस्तावित है।

इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य सचेतक और पार्टी के अन्य सचेतकों के साथ सत्र के दौरान सरकार और संगठन की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इसके बाद शाम 6 बजे लोक भवन में भाजपा विधायक दल की बैठक होगी। इसमें विधानसभा सत्र के दौरान पार्टी की तैयारियों और सदन में उठने वाले संभावित मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बोले- विपक्ष के हर सवाल का जवाब देगी सरकार

उधर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार विधानसभा में विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।

मानसून सत्र से पहले सपा के बहिष्कार और छोटे सत्र को लेकर उठे सवालों के बाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में चार दिन के इस सत्र के दौरान राम मंदिर चढ़ावा चोरी, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, जनसमस्याओं और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है।

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