क्या आंदोलन की दिशा बदल रही है? वांगचुक की नई शर्तों से बढ़ी सियासी हलचल, इस्तीफे की मांग नहीं

The Red Ink
सोनम वांगचुक के आंदोलन ने सोमवार को नया राजनीतिक मोड़ ले लिया। जिस भूख हड़ताल की शुरुआत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ हुई थी, अब सामने आई नई शर्तों में उस मांग का कोई जिक्र नहीं है। इसके साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों का केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के लिए पहुंचना भी इस आंदोलन की बदलती रणनीति की ओर इशारा कर रहा है।

नई शर्तों में बदला फोकस
सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने हस्तलिखित संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार हालिया परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करती, या फिर संसद में शिक्षा के मुद्दे पर चर्चा कराने का भरोसा नहीं दिया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी तबीयत और बिगड़ती है और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उनसे मिलकर शिक्षा और जवाबदेही का आश्वासन देते हैं, तो वे अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इन नई शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल नहीं है, जबकि आंदोलन की शुरुआत इसी मुद्दे से हुई थी।

इस्तीफे से जवाबदेही तक कैसे पहुंचा आंदोलन?
जून में CJP ने जंतर-मंतर से आंदोलन की शुरुआत करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी सबसे बड़ी मांग बताया था। बाद में सोनम वांगचुक भी इसी मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे। आंदोलन के दौरान शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और लद्दाख से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए, लेकिन शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग लगातार केंद्र में रही। अब आंदोलन की भाषा में आया बदलाव कई सवाल खड़े कर रहा है। नई अपील में सरकार से जवाबदेही, संसद में चर्चा और राजनीतिक दलों के आश्वासन की बात की गई है, जबकि इस्तीफे का मुद्दा पीछे छूटता दिखाई दे रहा है।

सरकार से बातचीत के संकेत
इसी बीच CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे। पार्टी का कहना है कि सरकार की ओर से बातचीत की पहल हुई है और प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों पर चर्चा करेगा। उधर, आंदोलन में शामिल AISA के कुछ छात्र नेताओं ने भी अपना अनशन समाप्त कर दिया है। इन घटनाक्रमों ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है कि आंदोलन अब टकराव से संवाद की ओर बढ़ रहा है।

सेहत भी बनी बड़ी वजह
सोनम वांगचुक फिलहाल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। उनकी पत्नी पहले अदालत का दरवाजा भी खटखटा चुकी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों ने भी आंदोलन की रणनीति पर असर डाला है। हालांकि, अब तक सरकार और आंदोलनकारियों के बीच किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन बदली हुई मांगें, सरकार से संवाद की शुरुआत और आंदोलन के बदले स्वर ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

Hot this week

‘अब लखनऊ आने के लिए अनुमति नहीं मांगेंगे’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन पर सीधा हमला

The Red Ink: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने...

Topics

‘अब लखनऊ आने के लिए अनुमति नहीं मांगेंगे’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन पर सीधा हमला

The Red Ink: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने...

Related Articles

Popular Categories