The Red Ink
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जारी भूख हड़ताल अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स, रॉयटर्स, वॉशिंगटन पोस्ट और एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने विस्तृत रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। इन रिपोर्टों में आंदोलन, वांगचुक की सेहत और सरकार की प्रतिक्रिया को प्रमुखता से जगह दी गई है।
20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने 28 जून को इस आंदोलन में हिस्सा लिया था। आंदोलन की शुरुआत कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने की थी। CJP प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रही है।
न्यूयॉर्क टाइम्स: युवाओं के आंदोलन को मिली नई गति
16 जुलाई को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने लाखों छात्रों के न्याय की मांग वाले आंदोलन को नई ऊर्जा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक 28 जून से केवल नमक मिले पानी के सहारे हैं। उन्होंने अखबार से बातचीत में कहा कि पीड़ित लोग अक्सर अपनी आवाज़ खुद नहीं उठा पाते, लेकिन इस बार युवा खुद आगे आए हैं और उनका समर्थन करना उनका दायित्व है। वांगचुक ने यह भी कहा कि वे पिछले चार दशकों से शिक्षा सुधार के लिए काम कर रहे हैं और यह मुद्दा उनके लिए नया नहीं है।
कॉकरोच जनता पार्टी कैसे बनी?
रिपोर्टों के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में हुई थी। यह उस समय चर्चा में आई जब भारत के सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसकी व्यापक आलोचना हुई। बाद में उन्होंने कहा था कि उनकी टिप्पणी की गलत व्याख्या की गई।
सरकार की प्रतिक्रिया पर क्या कहा गया?
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि केंद्र सरकार ने अब तक आंदोलनकारियों की मांगों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पिछले महीने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक टीवी इंटरव्यू में CJP को “अराजक तत्वों की बी-टीम” बताया था। वांगचुक ने कहा कि जनमत को जागरूक करना और सत्ता को जवाबदेह बनाना एक ही प्रक्रिया के दो पहलू हैं। उनके अनुसार, सरकार उनकी सेहत की चिंता करे या न करे, लेकिन जनता की राय अंततः सरकारों को प्रभावित करती है।
वांगचुक की सेहत पर बढ़ी चिंता
CJP के अनुसार, भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक का वजन करीब 9 किलोग्राम कम हुआ है। हालांकि, उनकी निगरानी कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल उनके प्रमुख स्वास्थ्य संकेतक सामान्य हैं। लेखिका अरुंधति रॉय समेत कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। इस बीच, कई लोगों ने वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार करते हुए लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।
रॉयटर्स: अदालत ने सरकार को दिए निर्देश
ब्रिटेन की समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, दिल्ली की एक अदालत ने सरकार को सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। रॉयटर्स ने लिखा कि यह पहला अवसर है जब अदालत ने इस प्रदर्शन के संदर्भ में हस्तक्षेप किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि उनकी तबीयत अधिक बिगड़ती है तो उन्हें अस्पताल ले जाने की संभावना भी बनी हुई है।
वॉशिंगटन पोस्ट: सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश
वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भूख हड़ताल के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन फिलहाल सरकार के रुख में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। रिपोर्ट में प्रदर्शन स्थल का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा गया कि कई सप्ताह की भूख हड़ताल का असर वांगचुक के स्वास्थ्य पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। वांगचुक ने अखबार से कहा कि यदि वे भूख हड़ताल नहीं करेंगे तो क्या हिंसा का रास्ता अपनाएं? उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का माध्यम है।
आयोजकों का दावा—सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा कि सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ समर्थन अब धीरे-धीरे ज़मीनी आंदोलन का रूप ले रहा है।
AP: सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद नहीं
एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत सरकार ने न तो आंदोलनकारियों से औपचारिक बातचीत शुरू की है और न ही सार्वजनिक रूप से उनकी मांगों को स्वीकार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने भी एजेंसी के सवालों का जवाब नहीं दिया। वहीं सरकार के कुछ नेताओं ने आंदोलन की आलोचना की, जबकि कुछ ने छात्रों की चिंताओं को गंभीर बताते हुए भी आंदोलनकारियों से बातचीत को आवश्यक नहीं माना।
अमेरिका स्थित संगठन ने प्रधानमंत्री मोदी से की अपील
अमेरिका स्थित भारतीय प्रवासी संगठन Hindus for Human Rights ने सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आंदोलनकारियों से मिलने की अपील की है। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखे खुले पत्र में संगठन ने कहा कि प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली, शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दे उठा रहे हैं। संगठन ने सरकार से आंदोलनकारियों से संवाद शुरू करने, परीक्षा संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और जवाबदेही तय करने की विश्वसनीय प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब केवल एक छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इसे भारत की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सरकार की प्रतिक्रिया के व्यापक संदर्भ में रिपोर्ट किया है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से अब तक आंदोलन की मुख्य मांगों पर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में 20 जुलाई को प्रस्तावित प्रदर्शन और वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर आगे की घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।




