The Red Ink Special: नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के दौरान बिहार के सिवान में AK-47 से हुई फायरिंग ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार पुलिस ने दावा किया था कि एक सिपाही ने भीड़ से घिरने के बाद जान-माल और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए AK-47 से चार राउंड हवाई फायरिंग की थी। हालांकि, घटना से जुड़े उपलब्ध वीडियो में कम से कम आठ राउंड फायरिंग दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
वीडियो और पुलिस के अलग-अलग बयानों के बीच कई सवाल सामने आए हैं। क्या सिपाही वास्तव में भीड़ में फंस गया था? क्या उसे फायरिंग का कोई आदेश मिला था? क्या गोली हवा में चलाई गई या प्रदर्शनकारियों की दिशा में? और क्या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तय प्रक्रिया का पालन किया गया?
मामले ने विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का मौका दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।
25 जुलाई को सिवान में क्या हुआ था?
25 जुलाई को सिवान में छात्र संगठनों और स्थानीय छात्रों के अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। एक ओर छात्र संगठन आइसा ने बिहार बंद का आह्वान किया था, जबकि दूसरी ओर स्थानीय छात्रों के एक स्वतंत्र समूह ने गांधी मैदान में शांतिपूर्ण सभा रखी थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय छात्रों के स्वतंत्र समूह ने पहले ही कार्यक्रम की जानकारी प्रशासन को दी थी। आयोजकों का कहना था कि कार्यक्रम को गैर-राजनीतिक रखा गया था और इसमें केवल तिरंगे का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया था।

आयोजकों के मुताबिक, सुबह शुरू हुआ कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ समाप्त कर दिया गया था। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के गांधी मैदान पहुंचने और नारेबाजी शुरू होने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दूसरी तरफ, जेपी चौक पर आइसा का प्रदर्शन चल रहा था। वहां बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक जुटे थे।
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद अलग-अलग समूहों के लोगों के इधर-उधर जाने के बीच माहौल बिगड़ने लगा।
पत्थरबाजी के बाद बढ़ा तनाव, पुलिस ने किया बल प्रयोग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गांधी मैदान के आसपास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी। इस दौरान पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं और पुलिस अधिकारियों के घायल होने की भी जानकारी दी गई।
इसके बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में फैल गए और कुछ समूह नगर परिषद मोड़ की ओर पहुंच गए। यहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच एक बार फिर टकराव हुआ। इसी दौरान AK-47 से फायरिंग की घटना सामने आई।
पुलिस ने कहा- चार राउंड हवा में चलाए, वीडियो में आठ राउंड का दावा
बिहार पुलिस मुख्यालय ने 27 जुलाई को जारी बयान में कहा था कि जेपी चौक के पास बंद समर्थकों से घिर जाने के बाद सिपाही अभिषेक कुमार ने जान-माल और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए AK-47 से चार राउंड गोली चलाई।
पुलिस के अनुसार, फायरिंग के दौरान राइफल का बैरल ऊपर की ओर था और गोली हवा में चलाई गई। घटना के बाद सिपाही को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई।

हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना के वीडियो में सिपाही द्वारा कम से कम आठ राउंड फायरिंग किए जाने का दावा किया गया है। वीडियो को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या गोली वास्तव में हवा में चलाई गई थी या फायरिंग की दिशा ऐसी थी, जिससे किसी व्यक्ति को चोट लगने की आशंका हो सकती थी। यही अंतर पुलिस की आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध वीडियो के बीच सबसे बड़ा विवाद बन गया है।
पहले फायरिंग से इनकार, बाद में AK-47 इस्तेमाल की बात स्वीकार
घटना के तुरंत बाद पुलिस की ओर से फायरिंग से इनकार किए जाने की बात भी सामने आई। उस समय यह कहा गया था कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे।
बाद में पुलिस अधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि AK-47 का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस का कहना था कि यह कार्रवाई जान-माल और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए की गई।
बयान में आए इस बदलाव ने भी कार्रवाई को लेकर सवाल बढ़ा दिए हैं। यदि शुरुआत में फायरिंग की जानकारी नहीं दी गई, तो बाद में इसे स्वीकार करने की वजह क्या थी? इस सवाल का स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
किसके आदेश पर चली AK-47?
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सिवान में AK-47 से गोली चलाने का आदेश किसने दिया था।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सिपाही अभिषेक कुमार जिला खुफिया इकाई से जुड़ा था और किसी दूसरे मामले के संबंध में जा रहा था। अधिकारी ने दावा किया कि वह रास्ते में भीड़ में फंस गया और उसने अपनी ओर से फायरिंग कर दी। पुलिस के अनुसार, उसे गोली चलाने का कोई आदेश नहीं दिया गया था। इसी आधार पर सिपाही को निलंबित किया गया।
लेकिन घटना से जुड़े वीडियो और एफआईआर में दर्ज जानकारी इस दावे पर सवाल खड़े करती है। उपलब्ध एफआईआर के मुताबिक, सिपाही की ड्यूटी एक पुलिस अधिकारी के साथ लगाई गई थी और वह भीड़ नियंत्रण के दौरान वहां मौजूद था।
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि वह केवल किसी दूसरे काम से जा रहा था और अचानक भीड़ में फंस गया था, तो उसकी ड्यूटी से जुड़ी जानकारी एफआईआर में क्यों दर्ज है?
क्या सिपाही सच में भीड़ से घिरा हुआ था?
पुलिस का कहना है कि सिपाही भीड़ में फंस गया था। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए वीडियो के आधार पर दावा किया गया है कि फायरिंग के समय सिपाही प्रदर्शनकारियों के बीच नहीं था।
वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने दिखाई देने की बात कही गई है। दोनों पक्षों के बीच कुछ दूरी थी और पुलिसकर्मी अन्य जवानों के साथ खड़ा था।
यदि सिपाही भीड़ के बीच नहीं था, तो आत्मरक्षा या भीड़ से निकलने के लिए AK-47 इस्तेमाल करने की पुलिस की दलील पर सवाल उठते हैं।
खुफिया इकाई का जवान वर्दी और सुरक्षा उपकरण में क्यों था?
मामले में एक और सवाल सिपाही की भूमिका को लेकर उठ रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वह जिला खुफिया इकाई से जुड़ा था। हालांकि, वीडियो में वह पुलिस की वर्दी, हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर पहने दिखाई दे रहा है।
कुछ पुलिस अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर सवाल उठाया कि यदि जवान खुफिया इकाई से जुड़ा था, तो वह पूरी दंगा नियंत्रण किट में वहां कैसे मौजूद था?
हालांकि, इस पर पुलिस की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
एक नहीं, दो जवानों के पास थी AK-47
सिवान के जिलाधिकारी ने घटना के बाद कहा था कि सिपाही को इस तरह सार्वजनिक स्थान पर AK-47 लेकर नहीं जाना चाहिए था और उसे फायरिंग का आदेश भी नहीं दिया गया था।
लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दिन सिवान के गांधी मैदान में पुलिस अधीक्षक के साथ मौजूद सुरक्षा कर्मियों के पास भी AK-47 थी।
पूर्व पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा में तैनात जवानों के पास ऐसे हथियार होना अलग बात है, लेकिन किसी भीड़ या प्रदर्शन के दौरान उनका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जा सकता है, यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
पूर्व डीजीपी अभयानंद ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि हालात को संभालने में धैर्य दिखाया जा सकता था।
तीन लोग घायल, पुलिस ने भीड़ की ओर से फायरिंग का जताया शक
25 जुलाई की हिंसा में तीन युवकों के घायल होने की जानकारी सामने आई। पुलिस का कहना है कि एक युवक को पुलिस की गोली लगी, जबकि अन्य दो को किसकी गोली लगी, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस की कुछ एफआईआर में प्रदर्शनकारियों की ओर से भी गोली चलाए जाने का दावा किया गया है। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास अलग-अलग बोर के कारतूस के खोखे मिलने की बात भी कही है।

हालांकि, स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि पूरे प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग कई कैमरों और मोबाइल फोन से की जा रही थी। ऐसे में यदि प्रदर्शनकारियों की ओर से भी गोली चलाई गई, तो उसका कोई स्पष्ट वीडियो सामने क्यों नहीं आया? यह सवाल जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
क्या भीड़ नियंत्रण की तय प्रक्रिया का पालन हुआ?
किसी प्रदर्शन के हिंसक होने पर पुलिस को आमतौर पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी होती है। पहले भीड़ को अवैध जमावड़ा घोषित कर चेतावनी दी जाती है। इसके बाद सार्वजनिक घोषणा, पानी की बौछार, लाठीचार्ज और आंसू गैस जैसे विकल्प अपनाए जाते हैं।
सिवान की घटना से जुड़े वीडियो में सार्वजनिक घोषणा या वॉटर कैनन के इस्तेमाल का स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि, पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या AK-47 का इस्तेमाल करने से पहले भीड़ को नियंत्रित करने के सभी उपलब्ध विकल्पों का पर्याप्त इस्तेमाल किया गया था?
छात्र आंदोलन और AK-47 का इस्तेमाल, सरकार से जवाब की मांग
नीट पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
राहुल गांधी ने दिल्ली में पैलेट गन और बिहार में AK-47 के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए सरकार पर छात्र आंदोलनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आरोप लगाया। वहीं, तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन छात्र प्रदर्शन के दौरान असॉल्ट राइफल के इस्तेमाल ने यह बहस खड़ी कर दी है कि क्या भीड़ नियंत्रण के लिए इतनी घातक क्षमता वाले हथियार का इस्तेमाल उचित था।
82 नामजद, छह एफआईआर और कई पुलिसकर्मी घायल
बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, सिवान में छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में छह एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें 82 लोगों को नामजद किया गया है।
पुलिस ने यह भी बताया कि हिंसा में सिवान के एसपी, दो डीएसपी समेत करीब 20 पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रशासन का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर गृह विभाग ने आयुक्त और डीआईजी से रिपोर्ट भी मांगी है।
जांच से साफ होंगे पुलिस के दावों और वीडियो के बीच के सवाल
सिवान में AK-47 से फायरिंग को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। पुलिस ने चार राउंड हवाई फायरिंग की बात कही, जबकि वीडियो में अधिक राउंड फायर होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस ने सिपाही के भीड़ में फंसने की बात कही, लेकिन वीडियो और एफआईआर की जानकारी अलग तस्वीर पेश करती है।

फायरिंग का आदेश किसने दिया, सिपाही की वास्तविक ड्यूटी क्या थी, गोली किस दिशा में चलाई गई और क्या भीड़ नियंत्रण की तय प्रक्रिया का पालन हुआ—इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से सामने आना जरूरी है।
छात्रों के आंदोलन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल ने सिर्फ सिवान पुलिस की कार्रवाई पर ही नहीं, बल्कि बिहार सरकार की जवाबदेही और प्रदर्शनकारियों से निपटने की नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




